आंखें नम, परंपराएं पीछे छूटीं — नैहरन पुखर में बेटियों ने निभाया बेटे से बड़ा फर्ज

102 वर्षीय प्रीतो देवी को सात बेटियों ने दी अंतिम विदाई, छोटी पुत्री रीना धीमान ने दी मुखाग्नि — समाज के सामने संवेदनाओं और संस्कारों की नई मिसाल

रक्कड़: 27मई: हार दयाल (नैहरन पुखर) गांव में एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर दिल को झकझोर दिया 102 वर्षीय प्रीतो देवी के निधन के बाद जब अंतिम विदाई का समय आया, तो परिवार ने परंपराओं की दीवारों से आगे बढ़कर इंसानियत और रिश्तों की सबसे मजबूत मिसाल पेश की।

प्रीतो देवी के परिवार में सात बेटियां हैं और कोई पुत्र नहीं था, लेकिन इस सच्चाई ने कभी उनके कर्तव्यों को कमजोर नहीं किया। अंतिम समय में जब विदाई की घड़ी आई, तो सातों बेटियों ने मिलकर मां को कंधा दिया और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाईं।

सबसे भावुक पल तब आया जब छोटी पुत्री रीना धीमान ने अपनी बहनों के सहयोग से मुखाग्नि देकर वह कर्तव्य निभाया, जिसे समाज अक्सर बेटे से जोड़कर देखता है। यह क्षण केवल एक रस्म नहीं रहा, बल्कि संस्कारों की सबसे गहरी अभिव्यक्ति बन गया।

अंतिम संस्कार के दौरान माहौल पूरी तरह भावुक था। ढोल-नगाड़ों और विदाई की रस्मों के बीच हर आंख नम थी, और गांव की चौपालों में बस एक ही बात गूंज रही थी — “बेटियां अगर चाह लें, तो हर फर्ज बेटे से बढ़कर निभा सकती हैं।”

इस घटना ने समाज की पुरानी धारणाओं को एक सशक्त संदेश दिया है कि परिवार का सहारा लिंग नहीं, बल्कि संस्कार और जिम्मेदारी होती है।


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