मिलाप कौशल खुंडियां
हिमाचल में यूं तो मनुष्य की आपात राहत व उत्थान के लिए अनेकों संस्थाएं काम कर रही हैं। सड़कों पर घूम रहीं वेसहारा गौवंश पर भी समय समय पर राजनीति भी होती रही है।गाय के नाम पर सैस भी लिया जाता रहा है।कई गाऊशालाऐं व गाय अभयारण्य भी बने हैं।फिर भी सडकों और बाजारों में बेसहारा गौवंश सैकंडों की संख्या में घूम रहा है।इनमें से असंख्य गौवंश या तो सड़क दुर्घटनावश पीड़ित है या फिर अन्य गंभीर स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से जूझ रहा है।यूं तो पूरे हिमाचल में हर दस बारह किलोमीटर में एक पशु चिकित्सालय है।
लेकिन इनकी सुध कौन लेगा यह कोई नहीं जानता।द रिपब्लिक ट्रस्ट मझीण जो कि अभी कांगड़ा और हमीरपुर दो जिलों में काम कर रहा है ने इन वेसहारा पीड़ित गौवंश के दर्द को समझा और इनका इलाज(चिकित्सीय सुविधा)करवाने का बीडा उठाया।एक पीड़ित बैल को देखकर द्रवित हुए इस संस्था के संस्थापकों ने वेसहारा पीड़ित गौवंश पर सर्च अभियान नादौन और ज्वालामुखी के आसपास के क्षेत्रों में चलाया।
बिभिन्न बीमारियों से पीड़ित गौवंश को देखकर उनके होश तब उड गए जब यह देखा कि बहुत से गौवंशो के जख्म सड़ रहे थे।भारी भरकम गौवंश को पकड़ना कोई आसान कार्य नहीं था।इसके लिए ट्रस्ट के स्वयंसेवकों ने पशु चिकित्सालय मझीण में कार्यरत डाॅ नम्रता से व नादौन पशु चिकित्सालय में कार्यरत डाॅ संदीप पाटिल से मिले।लेकिन नादौन,मझीण व आसपास के पशु चिकित्सालयो में tranquilizer dart gun ही उपलब्ध नहीं थी।
दो तीन केसों में तो इन चिकित्सको ने ट्रस्ट की मदद जरूर की लेकिन बाद में इन्होने भी हाथ खडे कर दिए।अब ट्रस्ट के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी थी।पीड़ित पशु बीमारियों से सड रहे थे।तब ट्रस्ट के स्वयंसेवको मनोहर लाल गान्धी,रविंद्र और रघुवीर ने जिलाधीश हमीरपुर से मिलने का निर्णय लिया और 27 जून 2026 को इस बात को लेकर मिले और पीड़ित गौवंश का दर्द उनके सामने रखा।ट्रस्ट के स्वयंसेवको ने 3 जुलाई तक इंतजार किया लेकिन अब उनका धैर्य भी जबाब देने लग पडा था।तभी उन्होने नादौन के एसडीएम महोदय से मिलने का निर्णय लिया और 4 जुलाई को सुबह 11 बजे एसडीएम नादौन से मिले। एसडीएम नादौन से मिलने के बाद उनके पता चला कि TRANQUILIZER DART GUN के उनके प्रयास प्रबान चढने वाले हैं। और अगले दो सप्ताह के भीतर पशु चिकित्सालय नादौन को TRANQUILIZER DART GUN मिलने वाली है यह जानकारी एसडीएम नादौन ने ही उनको दी।अब बात यह आ गई कि क्या 15 दिनों तक उन पीड़ित गौवंश को ऐसे ही छोड दिया जाए या फिर कोई राहत का रास्ता निकाला जाए।
एसडीएम नादौन और बीडीओ नादौन ने काफी मदद की और डाॅ संदीप पाटिल ने भी अपना जज्बा दिखाते हुए अपनी और से हर संभव प्रयास का भरोसा दिलाया और उसी दिन ट्रस्ट के स्वयंसेवको के साथ मिलकर गलू एक बैल का रेसक्यू कर लिया।अभी तक ट्रस्ट ऐसे पीडित 10/12 गौवंश केवल नादौन क्षेत्र में ही पहचान पाया है।तो सोचिए पुरे हिमाचल प्रदेश में ऐसे कितने वेसहारा पीड़ित गौवंश होंगे।ट्रस्ट के स्वयंसेवको मनोहर लाल गान्धी , रविंद्र ,रघुवीर और मोहिंदर पटवारी ने बताया कि अभी हमें काम करते हुए एक महीना ही हुआ है और हिमाचल के कई जिलों से उनको पीड़ित गौवंश के rescue के लिए फोन आ रहे हैं।ट्रस्ट के स्वयंसेवको का कहना है कि अगर ज्यादा से ज्यादा दानी सज्जनों का सहयोग मिला तो हम पुरे हिमाचल में पीड़ित गौवंश के लिए ही काम नहीं करेंगे बल्कि सडको पर वेसहारा घूम रहे गौवंश के लिए भी एक न एक दिन सहारा जरूर बनेंगे।आपको बता दें कि उक्त ट्रस्ट एक पंजीकृत संस्थान है जिसका पंजीकरण संख्या IN-HP78690490132223Yहै।जिसका मुख्यालय मझीण और एक उप कार्यालय नादौन और ज्वालामुखी में वर्तमान में संचालित हैं।
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