नब्ज पहचानने वाले मशहूर चिकित्सक की विरासत को मिला नया वारिस, HPPSC में सफलता से पूरे हिमाचल में चमका नाम
प्रदीप ठाकुर :रक्कड़: 13मई:कभी जिस घर के दरवाजे पर इलाज के लिए मरीजों की कतारें लगती थीं, आज उसी घर का बेटा सरकारी डॉक्टर बनकर चिकित्सा सेवा की नई इबारत लिखने जा रहा है। जिला कांगड़ा के ऐतिहासिक गांव गरली के युवा सिद्धांत वत्स ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) की मेडिकल ऑफिसर परीक्षा उत्तीर्ण कर एक ऐसी सफलता हासिल की है, जिसकी गूंज पूरे क्षेत्र में सुनाई दे रही है।
गगन वत्स (हैप्पी मेडिकल स्टोर) के सुपुत्र सिद्धांत वत्स की यह उपलब्धि केवल एक नौकरी पाने की कहानी नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों से चली आ रही सेवा, समर्पण और चिकित्सा परंपरा की जीत है। बचपन से ही दवाइयों, मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं के माहौल में पले-बढ़े सिद्धांत के मन में लोगों की सेवा करने का जज़्बा घर कर गया था। यही सपना आज मेडिकल ऑफिसर बनकर साकार हुआ है।
सिद्धांत ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय दादा डॉ. सुरेन्द्र मोहन वत्स, माता-पिता और परिवार के सहयोग को दिया है। डॉ. सुरेन्द्र मोहन वत्स का नाम आज भी गरली और आसपास के क्षेत्रों में सम्मान के साथ लिया जाता है। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि उनकी पहचान केवल एक डॉक्टर के रूप में नहीं थी, बल्कि लोगों के लिए उम्मीद और विश्वास का दूसरा नाम थे। मरीजों को उनकी चिकित्सा क्षमता पर इतना भरोसा था कि दूर-दूर से लोग उनके पास पहुंचते थे।
आज उसी परिवार के युवा ने प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया है कि सेवा की विरासत कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि नई पीढ़ियां उसे और ऊंचाइयों तक पहुंचाती हैं।
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