क्षेत्रीय कार्यशाला एवं ‘रिफॉर्म्स उत्सव’ का आयोजन: न्याय तक पहुंच को मजबूत बनाने पर जोर

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा— न्याय तक पहुंच संवैधानिक प्रतिबद्धता, टेली-लॉ और न्याय बंधु से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही सेवाएं


धर्मशाला, 15 जून।


विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा सोमवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धर्मशाला स्थित राजकीय महाविद्यालय (पीजी) सभागार में DISHA योजना के अंतर्गत टेली-लॉ कार्यक्रम पर क्षेत्रीय कार्यशाला तथा ‘रिफॉर्म्स उत्सव – 12 वर्षों के सुधारों का उत्सव’ आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य न्याय तक पहुंच, कानूनी जागरूकता, नागरिक सशक्तिकरण तथा न्याय क्षेत्र में किए गए परिवर्तनकारी सुधारों को जन-जन तक पहुंचाना रहा।


कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता तथा केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के दौरान न्याय विभाग ने “न्याय प्रबोध – अवेकनिंग टू जस्टिस” नामक वर्षभर चलने वाले कानूनी जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य नागरिकों में संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति समझ विकसित करना तथा न्याय व्यवस्था में जनभागीदारी बढ़ाना है।


इस पहल के अंतर्गत कई नागरिक-केंद्रित कार्यक्रम शुरू किए गए, जिनमें ‘90 सेकेंड में अपने अधिकार जानें’, ‘न्याय क्विज’ तथा ‘प्रो बोनो प्लेज’ शामिल हैं। प्रो बोनो प्लेज के माध्यम से अधिवक्ताओं, विधि छात्रों और कानूनी पेशेवरों को समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों के लिए स्वैच्छिक कानूनी सेवाएं देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।


न्याय विभाग के सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम न्याय तक पहुंच को सशक्त बनाने, संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने और नागरिकों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39(ए) के तहत समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि ‘न्याय प्रबोध’ अभियान कानूनी साक्षरता और नागरिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


उन्होंने पिछले 12 वर्षों में न्यायिक अवसंरचना, डिजिटल न्याय प्रणाली, कानूनी सहायता और नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक आधारित, समावेशी और सुलभ न्याय व्यवस्था विकसित भारत 2047 की आधारशिला है।


कार्यक्रम में टेली-लॉ पहल के लाभार्थियों के अनुभव साझा किए गए तथा एक डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई, जिसमें तकनीक आधारित कानूनी सेवाओं के जमीनी प्रभाव को दिखाया गया। लाभार्थियों ने बताया कि टेली-लॉ के माध्यम से उन्हें समय पर कानूनी सलाह और सहायता प्राप्त हुई।
‘रिफॉर्म्स उत्सव’ के दौरान न्याय क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। इनमें न्यायिक अवसंरचना का विस्तार, न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि, यौन अपराधों के मामलों के त्वरित निपटारे हेतु फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की स्थापना तथा ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना के माध्यम से न्यायालयों का डिजिटलीकरण शामिल रहा।


प्रस्तुति में बताया गया कि देशभर में 4.10 करोड़ से अधिक मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जा चुकी है, करोड़ों मामलों की ई-फाइलिंग हुई है तथा 32 करोड़ से अधिक केस रिकॉर्ड राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं DISHA योजना के तहत 1.12 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुकदमे से पूर्व कानूनी सलाह एवं सहायता प्रदान की गई है।


अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि न्याय तक पहुंच केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि संवैधानिक प्रतिबद्धता है। उन्होंने DISHA योजना, टेली-लॉ और न्याय बंधु जैसी पहलों को अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 1,725 से अधिक कानूनों में संशोधन अथवा निरसन कर न्याय व्यवस्था को अधिक सरल और नागरिक-केंद्रित बनाया है।
राज्यपाल श्री कविंद्र गुप्ता ने कहा कि विशेष रूप से दूरस्थ और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से अपने संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होने का आह्वान किया।


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