मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले के नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों एवं उप-प्रधानों को शपथ दिलाई

पारदर्शिता, जनभागीदारी और सुशासन के साथ गांवों के विकास का किया आह्वान

हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी, अगले पांच वर्षों में प्रदेश बनेगा आत्मनिर्भरः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कांगड़ा जिला के नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों एवं उप-प्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को प्रदेश को चिट्टा मुक्त बनाने और नशे के विरुद्ध जन आंदोलन को सशक्त बनाने का सामूहिक संकल्प भी दिलाया।

धर्मशाला के दाड़ी मैदान में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतें भारतीय लोकतंत्र की सबसे सशक्त इकाई हैं और ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने में उनकी केंद्रीय भूमिका है। पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं तथा गांवों के विकास, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के साथ-साथ सड़कों, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी सुनिश्चित करना उनका दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए, जिसकी वैचारिक आधारशिला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रखी थी। राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव समयबद्ध ढंग से संपन्न करवाए तथा बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए चुनाव प्रक्रिया को सुनियोजित ढंग से संचालित किया गया। उन्होंने बताया कि पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। वित्तीय अनुशासन, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और फुजूलखर्ची पर नियंत्रण के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया गया है। इसके अतिरिक्त ग्रीन बोनस, राजस्व घाटा अनुदान, शानन परियोजना, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड तथा अन्य विषयों पर हिमाचल के अधिकारों की मजबूती से पैरवी की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हितों की रक्षा करते हुए 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। भारत सरकार ने सैद्धांतिक रूप से सहमति दी है कि इस परियोजना के जल घटक से लाभान्वित राज्य हरियाणा, राजस्थान तथा दिल्ली हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत वहन करेंगे, जिससे राज्य पर वित्तीय बोझ कम होगा। परियोजना के पूर्ण होने पर प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये होगी। उन्होंने कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में रॉयल्टी संबंधी उच्चतम न्यायालय के निर्णय तथा वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल मामले में मिली सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे भी राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए श्री सुक्खू ने कहा कि गाय के दूध का समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये तथा भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ कच्ची हल्दी पर 150 रुपये, गेहूं पर 80 रुपये और मक्का पर 50 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। चंबा जिला की पांगी घाटी को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल बनाया गया है तथा प्राकृतिक जौ की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम सुनिश्चित की जा रही है। पहली बार अदरक की खरीद 30 रुपये प्रति किलोग्राम के समर्थन मूल्य पर की जा रही है। प्राकृतिक खेती के उत्पादों की ‘हिम’ ब्रांड के तहत सफल ब्रांडिंग की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवा रही है। शीघ्र ही पुलिस विभाग में 800 पदों पर कांस्टेबल की भर्ती की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मनरेगा की दिहाड़ी 247 रुपये से बढ़ाकर 320 रुपये प्रतिदिन कर दी है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले वित्त वर्ष में 250 लाख मानव-दिवस के लक्ष्य के मुकाबले 407 लाख मानव-दिवस सृजित किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की मूल अवधारणा में परिवर्तन किए जाने से हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 800 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार द्वारा सेना में अग्निवीर भर्ती योजना लागू करने और मनरेगा के स्वरूप में किए गए बदलावों के कारण राज्य में रोजगार के अवसरों में कमी आई है।

प्रदेश में बढ़ते नशे, विशेषकर चिट्टा को गंभीर सामाजिक चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बहुआयामी रणनीति के तहत नशा माफिया को समाप्त करने के लिए कार्य कर रही है। 15 नवंबर, 2025 से शुरू किया गया ‘एंटी- चिट्टा जन आंदोलन’ अब पूरे प्रदेश में जनभागीदारी का व्यापक अभियान बन चुका है। उन्होंने कहा कि 234 पंचायतों को चिट्टा प्रभावित श्रेणी में चिन्हित कर वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपनी पंचायतों को चिट्टा मुक्त बनाने और युवाओं को खेल, शिक्षा एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक समृद्धि के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों मंे पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा आरंभ की है। राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल चरणबद्ध तरीके से स्थापित किए जा रहे हैं तथा चयनित सरकारी विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया गया है। 5,400 से अधिक शिक्षकों की भर्ती और 150 सीबीएसई स्कूलों की स्थापना के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार ने अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण के लिए 213.75 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके तहत अत्याधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, डिजिटल रेडियोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल मैमोग्राफी सहित आधुनिक उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। शिमला के विभिन्न अस्पतालों में 40 करोड़ रुपये की लागत से इमेजिंग आर्काइव एवं रिट्रीवल टेक्नोलॉजी सिस्टम (पीएसीएस) स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे मरीजों की जांच रिपोर्टों और चिकित्सीय अभिलेखों का डिजिटल प्रबंधन सुनिश्चित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन को रोजगार का प्रमुख माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई पर्यटन नीति लागू की गई है। कांगड़ा जिला को पर्यटन राजधानी घोषित करने के बाद कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इस कार्य से प्रभावित किसानों को लगभग 2,500 करोड़ रुपये तथा अन्य प्रभावित परिवारों को भी नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित परिवारों के लिए मकान निर्माण सहायता को बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये से आठ लाख रुपये किया गया है।

श्री सुक्खू ने विश्वास व्यक्त किया कि नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे तथा आदर्श पंचायतों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।

सचिव, कृषि तथा पंचायती राज सी पालरासू ने नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही नीतियों, कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी दी।

उपायुक्त हेमराज बैरवा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

कृषि मंत्री चंद्र कुमार, आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादविंद्र गोमा, सांसद अनुराग शर्मा, विधायक एवं एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आर.एस. बाली, विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक संजय रतन, किशोरी लाल, कमलेश ठाकुर, मलेंद्र राजन तथा आशीष बुटेल, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (आईटी) गोकुल बुटेल, स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा, ऊन संघ के अध्यक्ष मनोज कपूर, कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष रामचंद पठानिया, सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष संजय चौहान, श्रम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर, एपीएमसी के अध्यक्ष निशु मोंगरा, ओबीसी निगम के अध्यक्ष प्रभात चौधरी, एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, धर्मशाला नगर निगम के पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी, पूर्व सांसद विप्लव ठाकुर, पूर्व विधायक सुरेंद्र काकू एवं जगजीवन पाल इस अवसर पर उपस्थित थे।


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