राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के तहत स्थानीय स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता उपायुक्त अनुपम कश्यप ने की।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 का उद्देश्य ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता (बौद्धिक दिव्यांगता) तथा बहु-विकलांगता से ग्रस्त व्यक्तियों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है। इस अधिनियम के अंतर्गत ऐसे दिव्यांग व्यक्तियों की देखभाल, सुरक्षा एवं संपत्ति के प्रबंधन के लिए कानूनी संरक्षक नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है।
जब कोई दिव्यांग व्यक्ति स्वयं अपने व्यक्तिगत, सामाजिक अथवा वित्तीय मामलों का प्रबंधन करने में सक्षम नहीं होता, तब उसके माता-पिता, रिश्तेदार या अन्य उपयुक्त व्यक्ति कानूनी संरक्षक के रूप में नियुक्त किए जाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह आवेदन जिला स्तर पर गठित स्थानीय स्तर समिति (Local Level Committee – LLC) के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
बैठक में बताया गया कि जिला में 108 दिव्यांगजन है जिनके लिए संरक्षक नियुक्त किए गए है। जिला भर में 7 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन्हें भी मंजूरी प्रदान कर दी गई है।
उपायुक्त ने कहा कि समिति आवेदन और संबंधित दस्तावेजों की जांच करने के बाद उपयुक्त व्यक्ति को कानूनी संरक्षक नियुक्त करती है। संरक्षक का दायित्व दिव्यांग व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, पुनर्वास, आवास तथा संपत्ति से जुड़े मामलों की देखभाल करना होता है। संरक्षक को यह सुनिश्चित करना होता है कि उसके सभी निर्णय दिव्यांग व्यक्ति के सर्वोत्तम हित में हों। यदि संरक्षक अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं करता है या दिव्यांग व्यक्ति के हितों की उपेक्षा करता है, तो स्थानीय स्तरीय समिति उसके विरुद्ध कार्रवाई कर सकती है तथा आवश्यकता पड़ने पर नए संरक्षक की नियुक्ति भी कर सकती है। यह व्यवस्था दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करती है। उपायुक्त ने कहा कि कानूनी संरक्षक की नियुक्ति में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
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