बिलासपुर में वार्षिक ऋण योजना का शानदार प्रदर्शन, 117.31 प्रतिशत लक्ष्य हासिल

डीएलआरसी एवं डीसीसी बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की शत-प्रतिशत संतृप्ति पर दिया जोर

बिलासपुर, 19 जून: जिला मुख्यालय के बचत भवन में अग्रणी बैंक यूको बैंक द्वारा जिला स्तरीय समीक्षा समिति (डीएलआरसी) एवं जिला समन्वय समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर ओम कान्त ठाकुर ने की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक ऋण योजना के तहत मार्च 2026 तक की उपलब्धियों, विभिन्न सरकारी योजनाओं की प्रगति तथा जिले में वित्तीय समावेशन की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र ग्रामीण एवं शहरी अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी बैंकों से आह्वान किया कि वे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शत-प्रतिशत संतृप्ति सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ना सभी संबंधित संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।

भारतीय रिजर्व बैंक, शिमला के प्रबंधक आशीष सांगड़ा ने बैंकों को री-केवाईसी प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने, अनक्लेम्ड जमा राशि को कम करने तथा वित्तीय समावेशन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने जिला के ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) में सुधार लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए सभी बैंक अधिकारियों एवं विभागीय प्रतिनिधियों से बीएलबीसी तथा डीसीसी/डीएलआरसी बैठकों में नियमित सहभागिता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक साहिल कीर्ति ने वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए संभावित ऋण योजना (पीएलपी) तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न विभागों, बैंकों एवं अन्य हितधारकों के साथ प्री-पीएलपी चर्चाएं आयोजित की गई हैं। इन बैठकों में कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी ऋण संभावनाओं और विकासात्मक आवश्यकताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया है।

अग्रणी जिला प्रबंधक एवं यूको बैंक बिलासपुर के एलडीएम चंद्रशेखर यादव ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के लिए 1770.75 करोड़ रूपए का वार्षिक ऋण योजना लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके मुकाबले बैंकों ने 2077.25 करोड़ रूपए का ऋण वितरित कर 117.31 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है, जो जिले की मजबूत बैंकिंग एवं आर्थिक गतिविधियों का परिचायक है।

उन्होंने बताया कि प्राथमिकता क्षेत्र में 81.18 प्रतिशत तथा गैर-प्राथमिकता क्षेत्र में 602.95 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किए गए हैं। कृषि क्षेत्र में 653.97 करोड़ रूपए, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में 586.97 करोड़ रूपए तथा अन्य प्राथमिकता क्षेत्रों में 25.65 करोड़ रूपए के ऋण वितरित किए गए हैं। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है तथा मार्च 2026 तक जिले में 50,344 किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि 31 मार्च, 2026 तक जिला का कुल बैंकिंग कारोबार बढ़कर 13,750.44 करोड़ रूपए तक पहुंच गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बैंक भविष्य में भी उद्यमिता, कृषि, स्वरोजगार और अन्य उत्पादक गतिविधियों को बढ़ावा देकर जिले के आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेंगे।

बैठक में ऋण-जमा अनुपात, जनधन से जन सुरक्षा अभियान, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना तथा वित्तीय समावेशन से संबंधित विभिन्न विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। अतिरिक्त उपायुक्त ने बैंकों को ऋण वितरण की संभावनाओं का विस्तार कर सीडी रेशियो में सुधार लाने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने के निर्देश दिए।

बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के प्रबंधक आशीष सांगड़ा, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक साहिल कीर्ति, अग्रणी जिला प्रबंधक चंद्रशेखर यादव, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, बैंक अधिकारियों, सरकारी संस्थानों एवं विकास प्राधिकरणों के प्रतिनिधियों सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।


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