देश के टॉप 25 अधिकारियों में सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा

10 अलग-अलग मानकों पर उत्कृष्ट

देश की एक प्रतिष्ठित पत्रिका ‘फेम इंडिया’ के देश व्यापी सर्वेक्षण में हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िला के उपायुक्त मनमोहन शर्मा का टॉप 25 ज़िला अधिकारियों में स्थान पाना जहां पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है वहीं सोलन ज़िला के लिए स्वर्णिम उपलब्धि है।

शांत और सरल स्वभाव के धनी मनमोहन शर्मा जहां हर समय आम जन की समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर रहते हैं वहीं सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए ज़िला के अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम को वह नेतृत्व प्रदान करते हैं जो योजनाओं के माध्यम से विकास के लाभ कतार में अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक समय पर पंहुचाने का ज़रिया बनता है।

वर्ष 2013 बैच के हिमाचल प्रदेश काडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मनमोहन शर्मा हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक सेवा के उन प्रतिष्ठित अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपनी शांत कार्यशैली, जनसरोकार और परिणामोन्मुख दृष्टिकोण से प्रशासनिक जगत में विशेष पहचान बनाई है।

फेम इंडिया-एशिया पोस्ट के ‘सर्वश्रेष्ठ ज़िलाधिकारी 2026’ के वार्षिक सर्वे में प्रशासनिक अधिकारी मनमोहन शर्मा को ‘कर्तव्यनिष्ठ’ श्रेणी में प्रमुख पाया गया है।

अपने प्रशासनिक जीवन में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। नालागढ़ में उपमण्डलाधिकारी, सिरमौर ज़िला में अतिरिक्त उपायुक्त के रूप में ज़िला स्तर पर ठोस निर्णयों को धार दी तो वहीं प्रदेश स्तर पर प्रारंभिक शिक्षा निदेशक, शहरी विकास निदेशक, शिमला स्मार्ट सिटी लिमिटिड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश पावर कार्पाेरेशन लिमिटिड में कार्मिक एवं वित्त निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर प्रदेश हित को साधने में योगदान दिया। इन सभी दायित्वों में उनकी कार्यशैली के मूल केंद्र में जनसरोकार, पारदर्शिता और परिणाम आधारित प्रशासन ही रहा है।

सोलन के उपायुक्त के रूप में उनका कार्यकाल बहुआयामी विकास और सुशासन का अनुपम उदाहरण बनकर सामने आया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ उन्होंने जन शिकायतों के त्वरित समाधान, राजस्व प्रशासन को मज़बूत करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने पर विशेष ध्यान दिया। नियमित जनसुनवाई, राजस्व लोक अदालतों और फील्ड निरीक्षणों के माध्यम से उन्होंने आम लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का प्रयास किया।

उन्होंने सोलन ज़िला में अतिक्रमण हटाने और सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर भी प्रभावी कदम उठाए। अवैध कब्जे हटाने, राजस्व अभिलेखों को व्यवस्थित करने और प्रशासनिक निगरानी को मज़बूत करने से भूमि प्रबंधन व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग-5 के फोरलेन निर्माण कार्य परियोजना से जुड़े मुआवज़ा क्षति और पुनर्वास मामलों की नियमित समीक्षा कर उन्होंने प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाई। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका कार्य उल्लेखनीय रहा है।

मनमोहन शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। ‘अपना विद्यालयः हिमाचल स्कूल अडाप्शन कार्यक्रम’ के अंतर्गत उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कोठों को गोद लेकर वहां शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर कार्य किया।

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में मनमोहन शर्मा का कार्य विशेष रूप से सराहनीय रहा है। वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद उन्होंने पुनर्वास और आपदा प्रतिरोधी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। ‘मॅाडल रेजिलिएंट विपेज’ परियोजना के अंतर्गत नालागढ़ क्षेत्र के सुनानी गांव में पुनर्निर्माण, आधारभूत अधोसंरचना की बहाली और आजीविका सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू किया गया।

उन्होंने मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं को बेहतर समन्वय और निगरानी के माध्यम से गति प्रदान की। महिला एवं बाल विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिया। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मिशन वात्सल्य, पोषण अभियान और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के कमज़ोर वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।

प्रदेश के मुख्यमंत्री की ‘नशा मुक्त हिमाचल’ की परिकल्पना के तहत उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने एंटी चिट्टा अभियान को सोलन में विशेष गति प्रदान की है। उपायुक्त के कुशल मार्गदर्शन में आज सोलन ज़िला पूर्ण समर्पण एवं ताकत के साथ नशे के सौदागरों पर प्रहार कर रहा है।

यह सर्वेक्षण मुख्य रूप से 10 अहम मानदंडों पर आधारित रहा है। उत्कृष्ट प्रशासनिक क्षमता, प्रभावी गवर्नेंस, दूरदर्शिता और नवाचार, जवाबदेह कार्यशैली, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, संकट प्रबंधन कौशल, संवेदनशीलता और गंभीरता, व्यवहार कुशलता, जनसंपर्क और संवाद क्षमता, और विकासोन्मुख सोच। ये मानदंड बताते हैं कि एक अधिकारी असल में ज़मीन पर कैसे काम करता है, वह मुश्किल वक्त में कैसे निर्णय लेता है, और आम लोगों से उसका रिश्ता कैसा है।

इन्हीं मानदण्डों पर खरे उतर कर मनमोहन शर्मा ने यह सिद्ध किया है कि यदि दृष्टिकोण जनकेंद्रित हो और इच्छाशक्ति मज़बूत हो, तो प्रशासन समाज में वास्तविक और सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।


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