मंडी, 17 अप्रैल। हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II) के अंतर्गत खंड परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी द्वारा निर्मित जरल खड्ड–समराहन प्रवाह सिंचाई योजना का हस्तांतरण कर दिया गया है। इस योजना से लगभग 8.5 हेक्टेयर भूमि सिंचाई सुविधा से जुड़ी है, जिससे 57 किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।
जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. हेमराज वर्मा ने बताया कि यह सिंचाई योजना क्षेत्र के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। योजना के तहत 620 मीटर लंबी कूहल का निर्माण किया गया है तथा खड्ड से पानी को खेतों तक सुचारु रूप से पहुंचाने के लिए मजबूत संरचना (हेड वियर) तैयार की गई है। इससे किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में सिंचाई जल उपलब्ध हो सकेगा, जिससे खेती की उत्पादकता में वृद्धि होगी।
उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों को अपनाने तथा बाजार से जुड़कर सरकार की कृषक हितैषी नीतियों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने फसल विविधीकरण को अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि इससे खेती अधिक लाभकारी बनेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
डॉ. वर्मा ने कृषक विकास संघ को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को नियमित रूप से बैठकें आयोजित करनी चाहिए और एक सामूहिक फंड बनाना चाहिए, ताकि बरसात या अन्य प्राकृतिक कारणों से कूहल को होने वाले नुकसान की समय पर मरम्मत की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना के रखरखाव की जिम्मेदारी किसानों के संगठन (कृषक विकास संघ) की होगी और सभी किसानों के सहयोग से यह योजना लंबे समय तक सफलतापूर्वक चलती रहेगी तथा क्षेत्र की कृषि को नई दिशा देगी।
इस अवसर पर विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. खूब राम तथा खंड परियोजना प्रबंधक डॉ. राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी एवं किसान उपस्थित रहे।
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