जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कुल्लू के माध्यम से नदियों में बाढ़ के खतरों को कम करने और आपदा न्यूनीकरण के उद्देश्य से नदी तल में ड्रेजिंग और खनन कार्यों की निगरानी के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
समिति की बैठक में उपायुक्त ने जानकारी दी कि समिति का उद्देश्य बाढ़ की रोकथाम के लिए ड्रेजिंग योग्य क्षेत्रों की पहचान करना, राजस्व दस्तावेज तैयार करना और निर्देशांक सुनिश्चित करना तथा ड्रेजिंग की जाने वाली सामग्री की मात्रा निर्धारित करने के लिए वन विभाग के माध्यम से ‘रैपलेनिशमेंट स्टडी’ सुनिश्चित करना है। उन्होंने कि इसके लिए उद्योग विभाग 3 मीटर की गहराई तक खनन योजना को मंजूरी देगा।
बैठक में निविदा कमेटी की द्वारा ड्रेजिंग को लेकर बनाए गए निविदा संविदा के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई जिसके आधार पर ड्रेजिंग कार्य के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम द्वारा आधार मूल्य निर्धारित कर नीलामी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि ड्रेजिंग की गहराई का निर्धारण स्थल की आवश्यकता और वैज्ञानिक अध्ययन की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा।
उपायुक्त ने खनन विभाग के अधिकारियों को खनन के लिए चिन्हित सभी स्थलों का पूर्ण ब्यौरा तथा छायाचित्रों सहित नियमित रूप से उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अवैध खनन को लेकर सख़्त कदम उठाए जाएंगे तथा खनन साइटों पर कैमरे से निगरानी रखी जाएगी। उन्होंने सभी सक्षम अधिकारियों को अवैध खनन पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रस्तुत टेंडर दस्तावेज का अनुमोदन किया गया।
बैठक में पुलिस अधीक्षक मदन लाल कौशल, एसडीएम निशांत ठाकुर, जिला राजस्व अधिकारी सुरभि नेगी, डीएफओ एंजेल चौहान, अधिशासी अभियंता जल शक्ति अमित कुमार, खनन अधिकारी वाईआर आजाद, एनएचएआई के उप प्रबंधक देवव्रत सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
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