चमक-दमक में दब गया “चौथा स्तंभ”, कालेश्वर मेले में मीडिया हाशिए पर

स्टार नाइट में कलाकारों पर रोशनी, लेकिन कवरेज करने वाले पत्रकार अंधेरे में—व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल- रक्षपाल शर्मा

प्रदीप ठाकुर :रक्कड़ :15अप्रैल :कालेश्वर महादेव बैसाखी मेला जहां एक ओर भव्यता, भीड़ और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा, वहीं दूसरी ओर इस आयोजन ने एक कड़वी सच्चाई भी उजागर कर दी—जिस मीडिया ने पूरे मेले को जन-जन तक पहुंचाया, वही खुद व्यवस्था से बाहर नजर आया।
वहीं जसवां-परागपुर प्रेस क्लब के सयोंजक रक्षपाल शर्मा व अध्यक्ष सुरजीत धीमान ने कड़े शब्दों में कहा कि स्टार नाइट के दौरान मंच पर रोशनी, साउंड और वीआईपी इंतजामों की चकाचौंध तो दिखी, लेकिन कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों के लिए न तो बैठने की व्यवस्था की गई और न ही कोई निर्धारित स्थान। नतीजा यह रहा कि मीडिया कर्मी पूरे कार्यक्रम के दौरान इधर-उधर खड़े रहकर काम करते रहे।

यह सवाल पूरे मेले के दौरान गूंजता रहा कि एक तरफ प्रशासन और आयोजक मेले की भव्यता का प्रचार चाहते रहे, वहीं दूसरी तरफ उसी प्रचार को संभव बनाने वाले पत्रकारों को बुनियादी सुविधा तक नहीं दी गई।

मेले के समापन पर पत्रकारों ने खुलकर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि राज्यस्तरीय आयोजन में इस तरह की अनदेखी न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि यह मीडिया के सम्मान को भी ठेस पहुंचाती है।

पत्रकारों ने साफ कहा कि यदि भविष्य में ऐसे आयोजनों में मीडिया के लिए अलग से बैठने, कवरेज और समन्वय की व्यवस्था नहीं की गई, तो यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह रहेगा।

कालेश्वर मेले की भव्यता के बीच यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बन गया है—क्या आगे आयोजनों में “चौथे स्तंभ” को उसका हक मिलेगा या फिर वह यूं ही भीड़ में गुम होता रहेगा?


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