हल्दी और लहसुन को जिला के प्रमुख निर्यात उत्पादों के रूप में किया चिन्हित

जिला निर्यात संवर्धन समिति की बैठक का आयोजन

बिलासपुर, 23 जून: जिला मुख्यालय स्थित बचत भवन में जिला निर्यात संवर्धन समिति (डीईपीसी) की बैठक का आयोजन उद्योग विभाग द्वारा किया गया। बैठक की अध्यक्षता सहायक आयुक्त राजकुमार ने की। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा संबंधित हितधारकों ने भाग लिया।

बैठक में विदेश व्यापार नीति-2023 के अंतर्गत भारत सरकार की डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स (डीईएच) पहल के तहत जिला बिलासपुर की निर्यात संभावनाओं तथा जिला निर्यात कार्ययोजना (डीईएपी) पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान जिले के विभिन्न कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य, पर्यटन तथा एमएसएमई उत्पादों की निर्यात क्षमता का आकलन किया गया।

विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत समिति ने हल्दी और लहसुन को जिला बिलासपुर के प्रमुख निर्यात उत्पादों के रूप में चिन्हित करने का निर्णय लिया। बैठक में बताया गया कि जिले की भौगोलिक एवं जलवायु परिस्थितियां इन दोनों फसलों के उत्पादन के लिए अनुकूल हैं तथा इनके प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

बैठक में जिला निर्यात कार्ययोजना के अंतर्गत निर्यात क्षमता वाले उत्पादों की पहचान, संभावित निर्यातकों का डेटाबेस तैयार करने, नए उद्यमियों को निर्यात गतिविधियों से जोड़ने तथा निर्यात प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है ताकि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सके।

सहायक आयुक्त राजकुमार ने कहा कि जिला बिलासपुर में मत्स्य एवं मत्स्य उत्पाद, शहद एवं मधुमक्खी उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन सेवाओं तथा अन्य एमएसएमई उत्पादों के क्षेत्र में भी व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को इन क्षेत्रों में कार्य कर स्थानीय उद्यमियों और उत्पादकों को निर्यात गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

बैठक में भारत सरकार की डाक निर्यात केंद्र पहल की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि यह सुविधा विशेष रूप से सूक्ष्म एवं लघु निर्यातकों को पार्सल निर्यात के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने में सहायता प्रदान करती है। साथ ही निर्यातकों को उपलब्ध लॉजिस्टिक सुविधाओं, निर्यात दस्तावेजीकरण, गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन प्रक्रियाओं तथा अन्य वैधानिक आवश्यकताओं के संबंध में जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया गया।

बैठक में निर्यात क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों जैसे सीमित जागरूकता, कोल्ड चेन एवं प्रसंस्करण सुविधाओं की आवश्यकता, निर्यात संबंधी दस्तावेजी प्रक्रियाओं की जटिलता तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई। समिति ने निर्यात जागरूकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण कार्यशालाओं, खरीदार-विक्रेता बैठकों तथा विभिन्न निर्यात संवर्धन संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्णय लिया। बैठक में बताया कि जिला निर्यात कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में पहचान मिलेगी, किसानों एवं उद्यमियों की आय में वृद्धि होगी तथा जिले में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।


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