श्रमिकों के सपनों को मिला सहारा, कल्याण बोर्ड बना भरोसे का साथी

कुल्लू, प्रदेश के विकास में निर्माण श्रमिकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मनरेगा, सड़कों, पुलों, भवनों और विभिन्न विकास परियोजनाओं को आकार देने वाले ये श्रमिक लंबे समय तक असंगठित क्षेत्र का हिस्सा रहे, जहां सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक संरक्षण की कमी एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे में हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड लाखों श्रमिक परिवारों के लिए आशा, सुरक्षा और सम्मान का आधार बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने श्रमिक कल्याण को प्राथमिकता देते हुए बोर्ड की योजनाओं को अधिक प्रभावी और जनोन्मुख बनाया है। आज यह बोर्ड केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर सहयोगी की भूमिका निभा रहा है।

कुल्लू के सेऊबाग के किशन (68 वर्ष) और रोपड़ी के गुने राम (67वर्ष) जैसे अनेक कामगार इसकी जीवंत मिसाल हैं। जीवन भर मेहनत-मजदूरी करने के बाद जब उम्र के कारण काम करना कठिन हो गया, तब बोर्ड से मिलने वाली मासिक पेंशन उनके लिए सम्मानजनक जीवन का सहारा बनी। इन्हीं की तरह अरछांडि के तोत राम, बबेली के मेहर चंद, ढालपुर के राम सिंह, पुइद के त्रिलोक चंद, गड़सा के भेड़ी देवी और नेउली के घंटु राम को भी इस वर्ष बुढापा पेंशन प्राप्त हो रही है। यह सहायता राशि सरकार की संवेदनशील सोच और श्रमिकों के प्रति जिम्मेदारी का भाव झलकता है।

बोर्ड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह श्रमिक और उसके परिवार दोनों को सुरक्षा प्रदान करता है। बच्चों की शिक्षा से लेकर उच्च तकनीकी एवं व्यावसायिक पढ़ाई तक आर्थिक सहायता, बेटियों के लिए एफडीआर योजना, विवाह सहायता, मातृत्व लाभ, स्वास्थ्य उपचार, गंभीर बीमारी सहायता और मृत्यु की स्थिति में परिवार को आर्थिक संबल जैसी योजनाएं श्रमिक परिवारों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में दी जा रही सहायता श्रमिक परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। आर्थिक तंगी के कारण जहां पहले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी, वहीं अब हजारों विद्यार्थी बोर्ड की सहायता से अपने सपनों को साकार कर रहे हैं। इसी प्रकार गंभीर बीमारी की स्थिति में मिलने वाली सहायता परिवारों को आर्थिक संकट से बचाने का काम कर रही है।

सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया को भी सरल और सुलभ बनाया है। मात्र दस रुपये के पंजीकरण शुल्क और न्यूनतम अंशदान के माध्यम से कोई भी पात्र निर्माण श्रमिक इस सुरक्षा कवच का हिस्सा बन सकता है। यह दर्शाता है कि सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक कामगारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।

कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से श्रमिकों और उनके परिवारों को नई तकनीकों और रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ना भी एक दूरदर्शी पहल है। इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ रही है, बल्कि बेहतर आय के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।

वास्तव में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड ने यह साबित किया है कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ किया जाए तो वे समाज के सबसे कमजोर वर्गों के जीवन में भी बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं। यह बोर्ड आज हजारों श्रमिक परिवारों के लिए आर्थिक सहायता से कहीं बढ़कर सम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक सुरक्षा का प्रतीक बन चुका है।

प्रदेश सरकार की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि विकास केवल आधारभूत ढांचे के निर्माण से नहीं, बल्कि उन हाथों की सुरक्षा और सम्मान से भी मापा जाता है जो विकास की इमारत खड़ी करते हैं। श्रमिक कल्याण बोर्ड इसी सोच को साकार कर रहा है और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुरक्षा एवं सम्मान पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।


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