कुल्लू,
जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II) में जिला परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी द्वारा कुल्लू, लाहौल व स्पीति व मंडी के किसानों को आधुनिक तकनीकों का उचित प्रयोग से गुणवत्तापूर्ण पैदावार एवं अधिक लाभदायक बनाने के लिये वि प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया जा रहा है।
इसी कड़ी में खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई कुल्लू व मंडी के 12 किसानों के लिये शिमला व सोलन का अध्ययन दौरा सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण, मशरूम उत्पादन और कृषि व्यवसाय विकास से संबंधित नवीनतम जानकारियाँ उपलब्ध करवाना था।

किसानों को सोलन स्थित आईसीएआर-डीएमआर मशरूम केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों को मशरूम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि मशरूम की खेती के लिए नियंत्रित तापमान और नमी का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। किसानों को मशरूम के बीज तैयार करने, समय में फसल तैयार करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीक की जानकारी दी।
साथ ही उन्हें विभिन्न प्रकार की मशरूम किस्मों जैसे बटन, ऑयस्टर और मिल्की मशरूम आदि की पहचान कराई गई।
इस भ्रमण से किसानों को मशरूम उत्पादन में मूल्य संवर्धन और बेहतर आय के अवसरों के बारे में जानकारी मिली। दूसरे दिन किसानों को डॉ. वाई.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी (सोलन) का भ्रमण कराया गया।
इस दौरान किसानों ने मृदा विज्ञान विभाग का दौरा कर मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता प्रबंधन के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई गई। उन्हें मृदा जांच के महत्व, उर्वरकों के संतुलित उपयोग और जैविक तरीकों से भूमि की उर्वरता बनाए रखने की तकनीक समझाई गई। इस अवसर पर फ्लोरीकल्वर विभाग में किसानों को फूलों की उन्नत किस्मों और उनकी खेती के तरीकों से अवगत कराया गया।
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