वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मंडी में प्रशिक्षण शिविर आयोजित

एसडीएम, बीडीओ व वन विभाग के अधिकारियों को दी गई विस्तृत जानकारी

मंडी, 24 अप्रैल। जिला मंडी में वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर डीआरडीए सभागार में एसडीएम, बीडीओ तथा वन विभाग के अधिकारियों के लिए एक दिवसीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान अधिनियम के तहत दावों की प्रगति, प्रक्रियाओं में सुधार तथा जमीनी स्तर पर आ रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को दावों की प्रक्रिया, आवश्यक साक्ष्यों और ग्राम सभा की भूमिका के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने की। उन्होंने कहा कि मंडी जिला में गद्दी, गुज्जर तथा अन्य वन-निर्भर समुदायों की उपस्थिति को देखते हुए जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों का इस कानून की प्रक्रियाओं से भली-भांति परिचित होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण एवं जागरूकता के प्रयासों से वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों के निपटान में तेजी आएगी तथा वन-निर्भर समुदायों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

उपायुक्त ने जानकारी दी कि राज्य सरकार के निर्देशों के अनुरूप जिला मंडी में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिले के सभी 12 उपमंडलों में प्रशिक्षण एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं, जिनमें ग्राम सभाओं, पंचायती राज संस्थाओं और वन अधिकार समितियों को शामिल किया गया है।

उन्होंने बताया कि अब तक 2722 वन अधिकार समितियों को संवेदनशील एवं पुनः सक्रिय किया गया है, जिनमें पहले निष्क्रिय समितियां भी शामिल हैं। मोहल सभाओं के माध्यम से इन समितियों को पुनर्जीवित किया गया है तथा दावों के आमंत्रण, जांच और निपटान की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। 220 निष्क्रिय समितियों को पहले ही सक्रिय किया जा चुका है।

बैठक में आयुक्त नगर निगम मंडी रोहित राठौर तथा अतिरिक्त सचिव राजस्व अनिल चौहान ने ऑनलाइन माध्यम से अधिकारियों को अधिनियम की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम वनभूमि पर निर्भर समुदायों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को दूर कर उनके अधिकारों को कानूनी मान्यता प्रदान करता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत पात्र समुदायों में वन में निवास करने वाली अनुसूचित जनजातियां तथा अन्य परम्परागत वन निवासी शामिल हैं। अन्य परम्परागत वन निवासियों के लिए 13 दिसंबर 2005 से पूर्व कम से कम तीन पीढ़ियों यानी 75 वर्ष से वनभूमि पर निर्भरता का प्रमाण आवश्यक है, जो भूमि विशेष के बजाय क्षेत्र की वनभूमि पर निर्भरता से संबंधित है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में अतिरिक्त उपायुक्त गुरसिमर सिंह, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ मदन कुमार सहित जिला के सभी उपमंडलाधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों तथा वन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।


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