बैरटी में भारत-जापान ज्ञान केन्द्र एवं मॉडल कृषि फार्म का शुभारम्भ

किसान क्लस्टर मेला भी आयोजित

जायका-इंडिया के प्रमुख ताकेउची ताकुरो ने किया उद्घाटन

जायका-इंडिया के प्रमुख ताकेउची ताकुरो ने आज सोलन के बैरटी स्थित सब्जी विकास केंद्र में भारत-जापान ज्ञान केंद्र एवं मॉडल कृषि फार्म का शुभारम्भ किया।

इस अवसर पर किसान क्लस्टर मेला भी आयोजित किया गया। इस मेले में बड़ी संख्या में किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा स्वयं सहायता समूहों ने भाग लिया।

परियोजना के अंतर्गत निर्मित तीन सिंचाई उप-परियोजनाओं की अवसंरचनाओं को भी संबंधित कृषक विकास संघों को औपचारिक रूप से हस्तांतरित किया गया।

जायका-इंडिया का यह मिशन हिमाचल प्रदेश फल विविधिकरण परियोजना-प्प् के अंतर्गत सोलन, पालमपुर एवं धर्मशाला में संचालित नवाचारी गतिविधियों के अवलोकन के लिए तीन दिवसीय दौरे पर है।

ताकेउची ताकुरो ने इस अवसर पर कृषि क्षेत्र में भारत-जापान सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। उन्होंने किसानों की आय वृद्धि, आधुनिक तकनीकों के प्रसार तथा जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने में परियोजना की भूमिका की सराहना की।

परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने कहा कि जायका के सहयोग से संचालित हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना-2 के अंतर्गत एक अभिनव कार्यक्रम की परिकल्पना की गई है। इसके माध्यम से हिमाचल प्रदेश के युवा किसानों को जापान में रोज़गारोन्मुख प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चयनित किसानों को जापान भेजने से पूर्व जापानी भाषा, संस्कृति, कार्य पद्धतियों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। आरम्भ में 150 युवाओं को चरणबद्ध रूप से प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव है।

बैरटी स्थित फार्म में हिमाचल स्मार्ट फार्मिंग परियोजना के अंतर्गत स्थापित हाई-टेक पॉलीहाउस खेती प्रणाली का भी लोकार्पण किया गया। यह हाई-टेक पॉलीहाउस प्रदेश में संरक्षित खेती एवं आधुनिक बागवानी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है। जापानी तकनीक और भारतीय नवाचार के समन्वय से विकसित यह पॉलीहाउस प्रदेश की भौगोलिक एवं जलवायुगत परिस्थितियों के अनुरूप किसानों को उच्च गुणवत्ता फसल उत्पादन के लिए विश्व स्तरीय तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करवाता है।

इस अवसर पर भारत में माचा उद्योग के निर्माण की अवधारणा की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इस प्रस्तावित माचा पहल का उद्देश्य प्रदेश की अनुकूल परिस्थितियों तथा विशेष रूप से कांगड़ा जैसे चाय उत्पादक क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली ग्रीन टी एवं माचा के उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देना है। दीर्घकालिक स्तर पर देश में एक स्वदेशी माचा पारिस्थितिकीय तंत्र विकसित करना है।

जायका मिशन ने इस अवसर पर हाई-टेक पॉलीहाउस खेती प्रणाली स्थापित करने वाली संस्था एम-टू-लैबो के साथ विस्तृत विचार-विमर्श भी किया।

उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों एवं अन्य ने कृषि प्रदर्शनी एवं मॉडल कृषि फार्म का अवलोकन भी किया। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धित उत्पादों, एफपीओ तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी में गहन रुचि ली।

किसान समूह मेले में सोलन, सिरमौर एवं शिमला जिलों के 300 से अधिक किसानों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों सहित कृषि विभाग ने भाग लिया। इस किसान समूह मेले का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, बाज़ारोन्मुख उत्पादन, सामूहिक विपणन तथा सफल कृषि मॉडलों से परिचित कराना था।

कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों एवं एफपीओ प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में कृषि, बागवानी एवं सामुदायिक विकास के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों, एफपीओ तथा स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।

सोलन के ज़िला परियोजना प्रबंधक डॉ. राजेंद्र सिंह ठाकुर ने सभी विशिष्ट अतिथियों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों तथा उपस्थित जनसमूह के प्रति धन्यवाद एवं आभार प्रकट किया।

इस अवसर पर उप परियोजना निदेशक डॉ. राजेश कुमार, राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (एसपीएमयू) के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. आशीष आनंद एवं डॉ. राकेश शर्मा, परियोजना प्रबंधन परामर्शी सेवा के विशेषज्ञ सुशील कुमार शर्मा एवं सुदर्शन सूर्यवंशी, उप निदेशक कृषि डॉ. देव राज कश्यप सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

जायका-इंडिया के मिशन दल में वरिष्ठ प्रतिनिधि सोता कोइडे, प्रतिनिधि ताइको इवामोटो तथा विकास विशेषज्ञ निष्ठा वेंगुरलेकर सम्मिलित हैं।


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