प्रेम हमारा स्वभाव है. प्रेम हमसे भिन्न नहीं है, प्रेम हमारी आत्मा का बल है

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रक्कड़, 3 जून ,  उक्त अमृतवचन श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के तृतीय दिवस में भागवताचार्य परम श्रद्धेय स्वामी अतुल कृष्ण महाराज ने रक्कड़ में व्यक्त किए. उन्होंने कहा कि जो नहीं जानते, परमात्मा के संबंध में बोलना उनके लिए बहुत आसान है. जो जानते हैं, उनके लिए बहुत कठिन, असंभव जैसा है. हम जो देखते हैं धीरे-धीरे वही हो जाते हैं. जो व्यक्ति सौंदर्य को देखता है, सुंदर हो जाता है. जो व्यक्ति संगीत में डूबता है, वह संगीतमय में हो जाता है. जो व्यक्ति ध्यान में डूबता है, वह ध्यान रूप हो जाता है. जो व्यक्ति परमात्मा में डूबता है वह ब्रह्ममय हो जाता है. परमात्मा को भूलकर संसार में रुचि रखना उसी प्रकार है जैसे अमृत की धार छोड़कर गंदे नाली के जल पीने की इच्छा रखना.


           अतुल कृष्ण जी महाराज ने कहा कि  भगवत्प्रेम सुख एवं दुख से परे का अनुभव है. जहां सुख होता है, वहां दुख भी आता ही है. जहां दुख होता है, वहां सुख आता ही है. जहां दुख नहीं है, वहां सुख भी नहीं है, वहां तीसरा तत्व है आनंद. आनंद का अर्थ महासुख नहीं, सुख एवं दुख से परे की अवस्था है आनंद. आज कथा में परमात्मा से विमुख प्राणियों की गति, अजामिलोपाख्यान एवं भगवान नृसिंह के चरित्र का सुंदर वर्णन श्रोताओं ने श्रवण किया.

इस अवसर पर प्रमुख रूप से सर्वश्री देशबंधु, सरपंच संजय कुमार, कथा के मुख्य यजमान विशाल शर्मा, विवेक शर्मा, अरविंद गौतम, सुरेश शर्मा, अमित शर्मा, अरविंद शर्मा, नरेश शर्मा, राकेश शर्मा, मनोज शर्मा, अनिल, विजय, सुधीर, अमित कुमार शर्मा, अश्विनी शर्मा, ईशान शर्मा, रमेश चंद, शुक्ला देवी, देविका शर्मा, राज शर्मा, हरि कृष्ण शर्मा, मंजू बाला शर्मा, पूजा ठाकुर, अनुराधा शर्मा, सुलक्षणा शर्मा, बबली शर्मा, अनु शर्मा, कमला देवी, मीना देवी, पूजा देवी, सोनू , इंदु शर्मा,  सुदर्शना ठाकुर, अनु शर्मा, पूनम, प्रिया शर्मा, स्नेह लता, स्वर्णा देवी, विमला देवी, सुदेश कुमारी, शारदा देवी, विनीता शर्मा, शालू शर्मा, नीता शर्मा, सोनिया शर्मा, पारुल शर्मा, सुदर्शना शर्मा, कांता शर्मा इत्यादि उपस्थित रहे.


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