जिला किन्नौर में पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से जिला सलाहकार समिति की बैठक आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, रिकांग पिओ में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के सदस्य सचिव एवं मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, रिकांग पिओ डॉ. सुधीर द्वारा की गई।
बैठक में अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन, भ्रूण लिंग चयन पर पूर्ण प्रतिबंध तथा पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों की निगरानी एवं निरीक्षण से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, जिले में जन-जागरूकता गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर डॉ. सुधीर ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में वर्तमान समय में कुल 09 अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं, जिनमें से 06 सरकारी क्षेत्र में तथा 03 निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि निजी क्षेत्र में कार्यरत केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम,1994 का किसी भी प्रकार से उल्लंघन न हो।
उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के उल्लंघन पर कड़े दंड का प्रावधान है। प्रथम अपराध के लिए तीन वर्ष तक का कारावास पुनः अपराध करने पर पांच वर्ष तक का कारावास हो सकता है, इसके अतिरिक्त संबंधित चिकित्सक का पंजीकरण भी निलंबित अथवा निरस्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर समिति के आधिकारिक एवं गैर-आधिकारिक सदस्यों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए तथा अधिनियम के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।
उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे भ्रूण लिंग चयन जैसी अवैध गतिविधियों के विरुद्ध जागरूक रहें तथा किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना प्रशासन को दें, ताकि इस सामाजिक कुरीति पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाया जा सके।
बैठक में निजी सदस्य हीरा देवी, राधा नेगी व चिकित्सक उपस्थित रहे।
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