धर्मशाला, 15 जून: हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आज सोमवार को पूरे प्रदेश में बहु-आपदा (मल्टी-हैजार्ड) आधारित 10वीं राज्य स्तरीय मेगा माॅक एक्सरसाइज का सफल आयोजन किया गया। इसी क्रम में जिला कांगड़ा में उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता तथा विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय का व्यापक परीक्षण किया गया।
जिला कांगड़ा में यह मेगा माॅक एक्सरसाइज दो चरणोंकृ में आयोजित किया गया। यह अभ्यास जिले के सभी 14 उपमंडलों में एक साथ संचालित किया गया। निर्धारित परिदृष्य के अनुसार प्रातः 9ः14 बजे जिले में रिक्टर पैमाने पर 7.8 तीव्रता का भीषण भूकंप आने की स्थिति का सिमुलेशन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में भवनों के क्षतिग्रस्त होने, लोगों के फंसने, भूस्खलन तथा अन्य आपदा संबंधी परिस्थितियां उत्पन्न हुईं।
भूकंप की सूचना प्राप्त होते ही जिला आपातकालीन संचालन केंद्र सक्रिय कर दिया गया तथा इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम के अंतर्गत सभी इंसिडेंट रिस्पांस टीमों एवं संबंधित विभागों को तत्काल कार्यवाही हेतु तैनात किया गया। अभ्यास के प्रथम चरण में 7.8 तीव्रता के भूकंप के परिदृष्य के आधार पर विभिन्न स्थानों पर खोज एवं बचाव, चिकित्सा सहायता तथा राहत कार्यों का संचालन किया गया।
इसके अलावा ज्वालाजी मंदिर में लगभग 63 श्रद्धालुओं के फंसे होने की स्थिति का अभ्यास किया गया। एसएसबी, एनडीआरएफ एवं एचपीएसडीआरएफ की संयुक्त टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला तथा घायलों के उपचार हेतु मौके पर अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किया जबकि सर्किट हाउस, धर्मशाला एवं आईटीआई शाहपुर केे भवनों के ढहने की काल्पनिक स्थिति में फंसे सभी 100 लोगों का सफल रेस्क्यू किया गया। वहीं आईटीआई शाहपुर में मलबे में दबे विद्यार्थियों को अग्निशमन विभाग एवं बचाव दलों द्वारा सुरक्षित निकाला गया। इसके अलावा जोनल अस्पताल, धर्मशाला फार्मेसी भवन के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में हेड कांस्टेबल बबली कुमार (स्टेजिंग एरिया कमांडर) के नेतृत्व में स्टेजिंग एरिया का प्रभावी प्रबंधन किया गया तथा 50 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाई गई।
इसके साथ ही आरजीजीईसी नगरोटा बगवां (ग्रीन काॅरिडोर अभ्यास) में गंभीर रूप से घायलों को शीघ्र उपचार उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग, पुलिस एवं एम्बुलेंस सेवाओं के समन्वय से विशेष ग्रीन काॅरिडोर स्थापित किया गया। इसके माध्यम से गंभीर मरीजों को त्वरित रूप से डाॅ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा पहुंचाया गया।
द्वितीय सायं कालीन सत्र में आगजनी, भूस्खलन एवं बहु-आपदा प्रतिक्रिया अभ्यास के दूसरे चरण में भूकंप के पश्चात उत्पन्न होने वाली आपदाओं जैसे आगजनी, भूस्खलन, सड़क अवरोध एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया। इसमें कोतवाली बाजार रोड एवं मैक्लोडगंज (भूस्खलन एवं मार्ग अवरोध) भूस्खलन के कारण प्रमुख सड़कों के अवरुद्ध होने की स्थिति का अभ्यास किया गया। लोक निर्माण विभाग द्वारा जेसीबी मशीनों एवं अन्य संसाधनों की सहायता से मलबा हटाकर मार्गों को पुनः बहाल किया गया, जिससे राहत एवं बचाव दलों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही आगजनी एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यास में जिले के विभिन्न स्थानों पर आग लगने की काल्पनिक घटनाओं के माध्यम से अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया गया। अग्निशमन विभाग, पुलिस, होमगार्ड, एचपीएसडीआरएफ तथा अन्य संबंधित एजेंसियों ने संयुक्त रूप से आग पर नियंत्रण, प्रभावित व्यक्तियों की निकासी तथा प्राथमिक उपचार संबंधी कार्यों का सफल संचालन किया।
सायंकालीन सत्र के दौरान विभिन्न विभागों एवं सुरक्षा बलों के मध्य समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों की तैनाती तथा त्वरित निर्णय प्रक्रिया का भी व्यापक परीक्षण किया गया, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रभावी पाया गया। इस मेगा माॅक एक्सरसाइज में जिला प्रशासन के नेतृत्व में सभी लाइन विभागों ने सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। भारतीय सेना, सशस्त्र सीमा बल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस विभाग, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, विद्युत विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों ने अपने-अपने निर्धारित दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षित आपदा मित्रों ने भी खोज एवं बचाव, प्राथमिक उपचार, भीड़ प्रबंधन तथा राहत कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान करते हुए सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
अभ्यास के उपरांत आयोजित समीक्षा बैठक में पाया गया कि जिला स्तर पर कमांड एवं नियंत्रण व्यवस्था, अंतर-विभागीय समन्वय तथा संचार प्रणाली प्रभावी रही। साथ ही भविष्य में वैकल्पिक उपग्रह संचार व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन यातायात मार्गों तथा संसाधन तैनाती तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता भी चिन्हित की गई।
जिला प्रशासन ने इस सफल आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी विभागों, सुरक्षा बलों, स्वयंसेवकों तथा आम जनता का आभार व्यक्त किया।
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