सत्य को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं, सत्य तो स्वयं सिद्ध है: अतुल कृष्ण



रक्कड़ , पूजा: सत्य को विचार करके नहीं खोजना है, सत्य को खोजना है भावना से. हृदय का फूल जब खिलता है तो सत्य का सूर्य उस पर चमकता है. परमात्मा अतर्क्य है. उसे तर्क से नहीं जाना जा सकता. जिसने सत्य को जाना है वह तर्क का भी उपयोग हितकर दिशा में करता है. जिसने सत्य को नहीं जाना उसके हाथ में तर्क का उपयोग खतरनाक है. जिसने सत्य को न जाना हो उसके लिए तर्क ही सब कुछ हो जाता है. जिसने सत्य को जान लिया वह तर्क को भी सत्य की सेवा में समर्पित कर देता है. जिसने सत्य को जाना है वह तर्क को अनुचर बना लेता है. सत्य तर्क पर भी सवारी कर सकता है ।


 उक्त अमृतवचन श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस में परम श्रद्धेय अतुल कृष्ण जी महाराज ने नाग मंदिर, रक्कड़ में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तलवार से हारा हुआ नहीं हारता, सिर्फ प्रेम से हारा हुआ हारता है. क्योंकि जब तक भीतर हृदय न झुक जाए तब तक सब झुकना व्यर्थ है. समझदार के हाथ में जहर भी औषधि बन जाती है. बहुत बार प्रतिभा शब्दों में उलझ कर हृदय की भाषा को विस्मृत कर देती है. परमात्मा तक तर्क की नाव से नहीं हृदय की नाव, प्रेम की नाव से पहुंचा जाता है. तर्क से सत्य को नहीं समझाया जा सकता. तर्क से केवल बादल छांटे, हटाए जा सकते हैं ताकि सत्य का सूरज दिखाई पड़ सके. सत्य को सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं, सत्य तो स्वयं सिद्ध है।


  महाराजश्री ने कहा कि किसी के पीछे चलना बहुत आसान है, अनुयाई  होना बहुत कठिन है. किसी को समझ लेना और उस समझ के अनुरूप अपने जीवन को विकसित करना सरल नहीं होता. एक ही परमात्मा है, अनेकता भ्रम है, एकता सत्य है. संसार में कौन जीतेगा, कौन हारेगा, कहना व्यर्थ है. हारेगा तो भी परमात्मा हारेगा, जीतेगा तो भी परमात्मा जीतेगा. जब वही जीत रहा है, वही हार रहा है तो विश्व विजय की घोषणा कौन करेगा. आज कथा में भगवान श्री कृष्ण की अनेक बाल लीलाएं, महारास, कंस-वध एवं श्रीरुक्मिणी विवाह का प्रसंग सभी ने अत्यंत तन्मयता से सुना. इस अवसर पर अनेक मनमोहक झांकियां भी निकाली गईं. आज रक्कड़ तहसील की तहसीलदार श्रीमती अनुजा शर्मा जी विशेष रूप से कथा में उपस्थित हुईं।

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