हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी  ने मोदी शासन के प्रतियोगी परीक्षा आयोजित करने के बड़े पैमाने पर अनियमिताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया।

शुभम ठाकुर  बिलासपुर।

सबसे पहले 4 जून को घोषित NEET यूजी परीक्षा के परिणाम पारदर्शिता के मुद्दे और पेपर लीक की शिकायत से घिर रहे हैं।
इसके बाद यूजीसी नेट परीक्षा इन में लाखों छात्र शामिल हुए थे विसंगति और पेपर लीक की रिपोर्ट के कारण परीक्षा बाद में रद्द कर दी गई ।

एनटीए ने नेट को भी स्थगित कर दिया जो मूल रूप से यूजीसी नेट के अगले सप्ताह में निर्धारित थी यह देरी केवल नेता के अपने कामकाज और अस्तित्व को बढ़ाते विश्वास को उजागर करती है इसके अलावा नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन ऑफ मेडिकल साइंस जो सीधे स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आता है , इन्होंने भी पेपर लीक और अनियमिताओं के प्रकारों का हवाला देते हुए अंतिम समय में NEET – PG प्रवेश परीक्षाओं को स्थगित करने का फैसला कर दिया है।


एक तरफ तो विभिन्न विभागों में खाली पड़े 30 से 35 लाख पदों पर भर्तियां नहीं हो रही है दूसरी तरफ NEET और यूजीसी NET समेत कई परीक्षाओं में मोदी सरकार द्वारा गठित निकायों के द्वारा आयोजित परीक्षा में धांधलियां  अपने चरम सीमा पर है ।

एसएफआई का मानना कि यूजीसी नेट परीक्षा में धांधलियों का अंदाजा बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है हिमाचल प्रदेश में भी इस परीक्षा के आयोजन कई परीक्षा केंद्रों में थे जिनके निष्पक्ष आयोजन के लिए ऑब्जर्वर यानी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई थी परंतु अधिकांश भाजपा व आरएसएस की विचारधारा। से सबंधित शिक्षक नियुक्त किए गए थे।


एसएफआई इस प्रदर्शन के माध्यम से  निम्नलिखित मांग करती है।
1 ) एनटीए प्रणाली को खत्म किया जाना चाहिए ।
2) केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए ।
हाल ही में नीट और नेट की  परीक्षा देने वाले छात्रों को मुआवजा मिलना चाहिए जो केंद्र सरकार को देना चाहिए।
3)पीएचडी प्रवेश के लिए अनिवार्य नेट स्कोर की हाल ही में अपनाई गई प्रणाली को वापस ले।


SFI मांग करती है कि NTA जैसी संस्था को बंद किया जाए वह शिक्षा मंत्री भारत सरकार नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे । वह इन घोटालों की जांच माननीय सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश के अधीन स्वतंत्र तरीके से की जाए।

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