रक्कड़, 14 अगस्त : हिमाचल प्रदेश में दूध उत्पादन और बिक्री पर निर्भर पशुपालकों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। दूध के कम दाम मिलने के बाद अब दो दिन तक सरकार द्वारा दूध कलेक्शन नहीं किए जाने की बात सामने आने से पशुपालकों में रोष है। पशुपालकों का कहना है कि दूध ऐसी वस्तु है जिसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं होता। ऐसे में यदि निर्धारित समय पर दूध की खरीद नहीं होगी तो इसका सीधा असर उनकी रोजमर्रा की आमदनी पर पड़ेगा।
पशुपालकों का कहना है कि पिछले काफी समय से वे दूध के उचित दाम की मांग कर रहे हैं। पशुओं के चारे, दवाइयों, रखरखाव और अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जबकि दूध के बदले मिलने वाली राशि उनकी मेहनत और लागत के अनुरूप नहीं है। कई परिवारों की रोजी-रोटी पशुपालन और दूध बिक्री पर निर्भर है। ऐसे में दूध का कम मूल्य मिलना पहले से ही उनके लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
दो दिन दूध कलेक्शन बंद होने से बढ़ी चिंता
पशुपालक जफ़र मुहम्मद ने कहा अब दो दिन तक दूध की खरीद नहीं होने की सूचना ने पशुपालकों की चिंता और बढ़ा दी है। पशुपालकों का कहना है कि प्रतिदिन सुबह-शाम दूध निकालना पड़ता है। यदि दूध लेने के लिए कलेक्शन सेंटर बंद रहता है तो उत्पादित दूध को कहां और कैसे रखा जाए, यह बड़ा सवाल है।
उनका कहना है कि दूध को निर्धारित समय पर बाजार या कलेक्शन सेंटर तक पहुंचाना जरूरी होता है। दो दिन तक खरीद नहीं होने की स्थिति में छोटे और सीमांत पशुपालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कम दाम और बढ़ती लागत से परेशान पशुपालक
पशुपालकों के मुताबिक पशुपालन को चलाने में खर्च लगातार बढ़ रहा है। पशुओं के लिए हरा एवं सूखा चारा, पशु आहार, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री महंगी होने से दूध उत्पादन की लागत भी बढ़ रही है। इसके बावजूद दूध का पर्याप्त मूल्य नहीं मिलने से पशुपालकों का कहना है कि पशुपालन का काम आर्थिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है।
पशुपालकों ने सरकार से मांग की है कि दूध खरीद व्यवस्था को नियमित रखा जाए और दूध का ऐसा मूल्य निर्धारित किया जाए, जिससे उन्हें उनकी मेहनत और उत्पादन लागत का उचित लाभ मिल सके।
सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
पशुपालकों ने सरकार और संबंधित विभाग से मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि दूध की खरीद को लेकर पहले से स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, ताकि किसानों और पशुपालकों को अचानक किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
पशुपालकों का कहना है कि यदि दूध खरीद व्यवस्था प्रभावित होती है तो इसका असर केवल पशुपालकों पर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। गांवों में बड़ी संख्या में परिवार दूध उत्पादन के माध्यम से अपनी आय अर्जित करते हैं।
पशुपालकों जफ़र मुहम्मद, शमशाद बीबी, मोहम्मद ख़लील, सलीम मोहम्मद, वकील मोहम्मद, रसील मोहम्मद, मोहम्मद शकील, गीता देवी, रशीद मोहम्मद, मनीर मोहम्मद, सुलेखा इत्यादि ने सरकार से मांग की है कि दूध का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के साथ-साथ नियमित कलेक्शन व्यवस्था को बनाए रखा जाए**, ताकि पशुपालन से जुड़े परिवारों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
पशुपालकों में दूध बिक्री को लेकर बढ़ा रोष, पहले कम दाम अब दो दिन दूध नहीं लेगी सरकार
