नई दिल्ली, 30 सितंबर। राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन ‘रबी अभियान 2026’ के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने प्रदेश के कृषि क्षेत्र के समग्र विकास, किसानों की आय में वृद्धि तथा पर्वतीय क्षेत्रों की विशिष्ट कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
कृषि मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 88.85 प्रतिशत किसान सीमांत एवं लघु श्रेणी के हैं। ऐसे में छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण, कृषि अवसंरचना, सिंचाई, आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती तथा बेहतर बाजार व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में छोटी जोत, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और अधिक उत्पादन लागत के कारण किसानों के सामने अनेक चुनौतियां हैं। इसलिए पारंपरिक अनाज आधारित खेती के साथ सब्जियों, फलोत्पादन, प्राकृतिक खेती तथा उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
प्रो. चंद्र कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश के कृषि क्षेत्र एवं किसानों के हित में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत ₹28.31 करोड़ तथा कृषि उन्नति योजना (KY) के अंतर्गत ₹36.51 करोड़, अर्थात कुल ₹64.82 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की गई है। उन्होंने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन निधियों के माध्यम से प्रदेश में कृषि से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों को गति मिलेगी तथा इसका प्रत्यक्ष लाभ किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन निधियों का समुचित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करेगी, ताकि अधिक से अधिक किसान केंद्र प्रायोजित योजनाओं से लाभान्वित हो सकें। कृषि मंत्री ने कृषि अनुसंधान एवं विकास पर अधिक निवेश की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों, पर्वतीय कृषि की विशिष्ट आवश्यकताओं तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनुसंधान एवं विकास को और मजबूत करना आवश्यक है। इसके लिए कृषि अनुसंधान संस्थानों में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने, आधुनिक तकनीक अपनाने तथा मानव संसाधन को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रो. चंद्र कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। प्राकृतिक खेती के तहत उत्पादित मक्के के लिए ₹50 प्रति किलोग्राम तथा गेहूं के लिए ₹80 प्रति किलोग्राम का विशेष न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादन लागत अधिक होने तथा भौगोलिक परिस्थितियां कठिन होने के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना आवश्यक है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में किसानों को समय पर और सटीक बाजार जानकारी उपलब्ध करवाना भी अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए मंडियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर वास्तविक समय के बाजार भाव, मांग एवं पूर्वानुमान, मौसम की जानकारी तथा भंडारण की उपलब्धता संबंधी सूचनाएं मोबाइल संदेश एवं डिजिटल सेवाओं के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के किसानों के हित में कृषि क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़, टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
