वन्यजीव संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवासों और गलियारों का संरक्षण जरूरी
गोहर/मंडी, 8 अक्तूबर। कॉलेज ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री (सीओएचएंडएफ), थुनाग स्थित गोहर में 72वें राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह-2026 का आयोजन जागरूकता और उत्साह के साथ किया गया। इस वर्ष वन्यजीव सप्ताह की थीम ‘आवासों को जोड़ना, वन्यजीवों को फलने-फूलने का अवसर देना’ (Connecting Habitats, Thriving Wildlife) रही।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए निबंध लेखन, पोस्टर प्रस्तुति और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा तथा वन्यजीव गलियारों के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। साथ ही, स्थानीय वन्यजीव प्रजातियों और जैव विविधता के संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर भी चर्चा की गई।
इस अवसर पर गिद्ध संरक्षण, हिम तेंदुआ परियोजना, बाघ एवं हाथी अभयारण्य, भारत में डॉल्फिन एवं कछुआ संरक्षण परियोजनाओं तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क (PAN) से जुड़ी विभिन्न संरक्षण पहलों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना और विभिन्न आवास क्षेत्रों के बीच वन्यजीव गलियारों को बनाए रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम का समन्वय डॉ. रीनू कुमारी और डॉ. बंदना धीमान ने किया। सहायक प्रोफेसर डॉ. नेहा ठाकुर ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग अथवा संरक्षण एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें विद्यार्थियों, युवाओं और आमजन की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आवासों और वन्यजीव गलियारों का संरक्षण जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी को वन्यजीवों और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनके संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।
