नेपाल में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई गांवों, सड़कों, पुलों और बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ का असर नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन, तनहूं और नवलपरासी समेत कई जिलों तक पहुंचा है।
162 लोगों की मौत
नेपाल पुलिस के 27 अगस्त सुबह के आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में 162 लोगों की मौत हो चुकी है और 41 घायल विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। चितवन में सबसे अधिक 64 शव बरामद हुए हैं, जबकि नवलपरासी पूर्व में 26, धादिंग में 27 और गोरखा में 20 शव बरामद किए गए हैं।
826 लोग लापता
बाढ़ के बाद 826 लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें स्थानीय लोगों के साथ सुरक्षा कर्मी और बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार 590 पर्यटक संपर्क से बाहर हैं, जिनमें 476 विदेशी और 114 नेपाली पर्यटक बताए गए हैं। लापता विदेशी पर्यटकों में 177 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
कैसे आई इतनी बड़ी तबाही?
प्रारंभिक जांच के मुताबिक यह आपदा पहाड़ से बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने के बाद आई। इससे नदी का प्रवाह अचानक बाधित हुआ और फिर भारी मात्रा में पानी, मलबा और चट्टानें तेज रफ्तार से नीचे की ओर बह निकलीं। विशेषज्ञों के अनुसार इसी मलबे से भरी बाढ़ ने नदी किनारे बसे इलाकों में कुछ ही समय में भारी तबाही मचा दी।
गांव और सड़कें तबाह
बाढ़ के पानी और मलबे ने कई घरों, वाहनों और पुलों को बहा दिया। रसुवा के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों पर भी असर
बाढ़ से प्रभावित इलाका कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। बड़ी संख्या में विदेशी और भारतीय यात्री इस क्षेत्र में मौजूद थे, जिनमें कई अब तक संपर्क में नहीं आए हैं।
युद्धस्तर पर राहत-बचाव अभियान
नेपाल सरकार ने सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को राहत एवं बचाव अभियान में लगाया है। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। नदी किनारे और प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश जारी है। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़कें अभियान में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
नेपाल में आई यह जल प्रलय हिमालयी क्षेत्र की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक बनती जा रही है। राहत और बचाव अभियान जारी है तथा मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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