जहां व्यवस्था नहीं पहुंची, वहां संजय पराशर बने सहारा                         -पराशर ने जांलधर के निजी अस्पताल में करवाए 24 मरीजों के मोतियाबिंद आपरेशन





रक्कड़, 

(आनंद): जसवां-प्रागपुर क्षेत्र की रिड़ी कुठेड़ा पंचायत में हाल ही में कैप्टन संजय पराशर द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर ने कई जरूरतमंद लोगों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी भर दी है। इस शिविर के बाद शनिवार को मोतियाबिंद से पीड़ित 24 मरीजों को आपरेशन के लिए संजय पराशर द्वारा एक बस में जालंधर स्थित निजी अस्पताल में भेजा गया था।

मरीजों ने यह बताया कि उनके मोतियाबिंद के सफल आपरेशन हो चुके हैं और वे अब पहले की तुलना में स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम हैं। ग्रामीण और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्र में रहने वाले इन मरीजों के लिए यह पहल किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है। रिड़ी कुठेड़ा वासी सेवानिवृत सूबेदार सिंह रत्न सिंह, रछपाल और मलकीयत सिंह ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमाएं किसी से छिपी नहीं हैं।



आपरेशन करवाकर आए पवन कुमार, मीना देवी, कमलेश रानी, प्रकाश चंद, रमेश कुमार, किरण बाला, प्रीतम चंद, अर्तित सिंह, श्याम लाल, अशोक कुमारी ने बताया कि संजय पराशर लंबे समय से सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं। रिड़ी कुठेड़ा में पराशर द्वारा पहले भी स्वास्थ्य शिविर को आयोजन करवाया गया था और तब भी आंखों के आपरेशन करवाए गए थे।



मरीजों संदेश देवी, आशा रानी, पुष्पा देवी, ममता, नरेंद्र सिंह, कांता देवी, राजेंद्र सिंह, कश्मीर सिंह और कर्ण चदं कहा कि आमतौर पर ऐसे स्वास्थ्य शिविरों में केवल जांच तक ही सीमित रहना पड़ता है और आगे के इलाज का खर्च मरीजों पर ही छोड़ दिया जाता है। लेकिन संजय पराशर आपरेशन तक की पूरी जिम्मेदारी उठाते हैं और इस दौरान मरीजों के ठहरने व खाने-पीने की व्यवस्था भी पराशर द्वारा की जाती है,  जोकि अपने आप में एक दुर्लभ और सराहनीय पहल है।



रिड़ी कुठेड़ा पंचायत के वासियों में राजेश, विकास, शारदा देवी, संजीव, आदित्य और विवेक ने इस पूरे अभियान के लिए संजय पराशर का आभार व्यक्त जताते हुए कहा कि जब समाज में संजय पराशर जैसे व्यक्तित्व आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाते हैं, तो उसका प्रभाव इलाज तक सीमित नहीं रहता, अपितु इससे पूरे समुदाय में विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत होती है। कहा कि कैप्टन पराशर द्वारा संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ किया गए प्रयास उन लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव ला रहे हैं, जिनके लिए अंधकार स्थायी होता जा रहा था, लेकिन पराशर की यह पहल उम्मीद की एक नई किरण साबित हुई है।


Discover more from Newshimachal24

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Discover more from Newshimachal24

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading