मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना : जिला सिरमौर में स्वस्थ भविष्य की नींव


नाहन

प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय विद्यालयों के बच्चों के पोषण को बढ़ावा देने के लिए प्री प्राईमरी से माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को पोषण युक्त भोजन प्रदान करने के लिए “मिड-डे-मील” योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।

पोषण के इस अभियान को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए “मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना” जिला सिरमौर के लिए एक बड़ा वरदान साबित हुई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत अब नियमित भोजन के साथ-साथ विद्यार्थियों को सप्ताह में एक बार उबला हुआ अंडा अथवा ताजे मौसमी फल “मिड-डे मील” के अतिरिक्त पोषण के रूप में दिए जा रहे हैं।


सरकार के इन सकारात्मक प्रयासों एवं शिक्षा विभाग की सक्रियता से आज सिरमौर का हर सरकारी विद्यालय एक खुशहाल विद्यालय एवं स्वास्थ्य-केंद्र बन गया है, जहाँ प्रत्येक नौनिहाल के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यह समग्र दृष्टिकोण न केवल साक्षरता की दर बढ़ा रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त भी बना रहा है।


जिला सिरमौर की 1,450 राजकीय पाठशालाओं में प्री-प्राइमरी से आठवीं कक्षा तक के कुल 55,612 विद्यार्थी “मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना” के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं। इस आधार पर औसतन प्रत्येक विद्यालय में लगभग 38 विद्यार्थियों को प्रतिदिन मध्याह्न भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। यह निरंतर पोषण सहायता बच्चों के शारीरिक विकास, उपस्थिति एवं सीखने की क्षमता को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हो रही है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले में पोषण सुरक्षा को मजबूत आधार मिला है।


सिरमौर के राजकीय विद्यालयों ने आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिखते हुए “स्कूल न्यूट्रिशन गार्डन” विकसित किए हैं। इन क्यारियों के माध्यम से बच्चों को प्रतिदिन ताज़ी और जैविक सब्जियां मिल रही हैं, जिससे “मिड-डे मील” की पौष्टिकता कई गुना बढ़ गई है। साथ ही विद्यार्थी खेल-खेल में जैविक खेती और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल भी सीख रहे हैं।

समाज को विद्यालयों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा “तिथि-भोजन” जैसी अनूठी परंपरा को बढ़ावा दिया गया है, जिसे शिक्षा विभाग द्वारा तत्परता से लागू किया जा रहा है। इसके अंतर्गत स्थानीय समुदाय के लोग अपने निजी खुशी के अवसरों पर बच्चों के साथ मिलकर पौष्टिक भोजन साझा करते हैं, जो सामाजिक समरसता एवं सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।


भोजन की गुणवत्ता एवं स्वाद में निरंतर सुधार लाने के उद्देश्य से जिला शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर खंड-स्तरीय कुकिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है। इन आयोजनों के माध्यम से रसोइयों को नई भोजन-तैयारी विधियों एवं पोषण संबंधी मानकों की जानकारी मिलती है, जिससे विद्यालयों की रसोई में बनने वाले भोजन का स्तर और भी बेहतर हुआ है।

विद्यार्थियों के शारीरिक विकास की निगरानी हेतु प्रशासन द्वारा “राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम” के अंतर्गत नियमित स्वास्थ्य जांच शिविरों का संचालन भी किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के हजारों बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें आयरन, फोलिक एसिड तथा कृमि-मुक्ति की दवाइयाँ प्रदान की गई हैं, जो बच्चों को कुपोषण एवं बीमारियों से बचाने में प्रभावी सिद्ध हो रही हैं।

कार्यक्रम के तहत जिला के राजकीय विद्यालय के शत-प्रतिशत बच्चों को योजना का लाभ प्रदान किया गया है।
हिमाचल के भविष्य को संवारने की दिशा में जिला सिरमौर में शिक्षा और स्वास्थ्य का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते आज जिले के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इस पूरी व्यवस्था की नींव वे हजारों “कुक-कम-हेल्पर (सी.सी.एच.एस.)” हैं, जो विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ भोजन तैयार करते हैं। इनके योगदान का सम्मान करते हुए सरकार द्वारा उन्हें समय पर ₹5,000 का मासिक मानदेय सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है तथा वे और अधिक स्वच्छता एवं सेवाभाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।


हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के दृष्टिगत राज्य की समस्त राजकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक पाठशालाओं में “मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील)” का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।


जिला सिरमौर में योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए धनराशि का आवंटन सीधे “पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पी.एफ.एम.एस.)” पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन की लागत एवं मेनू को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है, ताकि समुदाय भी इसकी निगरानी कर सके। जिले में “मिड-डे मील” भोजन में विविधता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चार सप्ताह का विस्तृत मेनू तैयार किया गया है, जिसमें राजमा-चावल, पुलाव, काला चना, कढ़ी जैसे स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजनों को शामिल किया गया है।


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