प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी मुख्यमंत्री सुखाश्रय तथा इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजनाएं बेसहारा बच्चों के लिए रोशनी की किरण बनकर उभरी हैं। सोलन ज़िला में इस वर्ष इन योजनाओं के तहत एक करोड़ 60 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। यह जानकारी आज यहां उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने दी।
मनमोहन शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार बेसहारा बच्चों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं कार्यान्वित कर रही है ताकि यह बच्चे समय पर सहायता प्राप्त कर अपनी प्रतिभा के माध्यम से बेहतर अर्जित कर सके।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता तथा निराश्रित महिलाओं के 18 वर्ष तक के बच्चों और दिव्यांग माता-पिता के 18 वर्ष तक के बच्चों को हर महीने एक हजार रुपए तक की सहायता प्रदान की जा रही है।
योजना के तहत पात्र परिजनों की वार्षिक आय एक लाख रुपए से कम होनी चाहिए। इस वर्ष योजना के तहत 18 वर्ष तक के 1155 बच्चों को 81 लाख 35 हजार 130 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता, निराश्रित महिलाओं एवं दिव्यांग माता-पिता के 18 से 27 वर्ष के बच्चों को सरकारी संस्थानों में उच्च शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए होने वाले खर्च को भी प्रदेश सरकार वहन कर रही है। योजना के तहत पात्र परिजनों की वार्षिक आय एक लाख रुपए से कम होनी चाहिए। सोलन ज़िला में ऐसे 34 बच्चों को उच्च एवं व्यवसायिक शिक्षा प्रदान करने पर इस वर्ष 2,53,946 रुपए खर्च किए गए हैं।
मनमोहन शर्मा ने कहा कि महत्वकांक्षी मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के तहत 27 वर्ष तक के बेसहारा, परित्यक्त, अभित्यक्त एवं ट्रांसजेंडर बच्चों व व्यक्तियों जिनकी वार्षिक आय 05 लाख रुपए से कम है, को प्रति माह 04 हजार रुपए की राशि प्रदान की जाती है। सोलन ज़िला में ऐसे 187 बच्चों को 42,63,294 रुपए की सहायता प्रदान की गई है। उच्च शिक्षा, व्यावसायिक एवं कौशल विकास 17 बच्चों को 2,85,650 रुपए की राशि प्रदान की गई है।
उन्होंने कहा कि 08 बेसहारा बच्चों के विवाह पर 16 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बेसहारा बच्चों को घर बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 03 लाख रुपए की सहायता प्रदान की जा रही है। ऐसे 13 बच्चों को आवास निर्मित करने के लिए एक लाख रुपए की पहली किश्त के रूप में 13 लाख रुपए उपलब्ध करवाए गए हैं।
उपायुक्त ने लोगों से आग्रह किया कि इन योजनाओं की पूरी जानकारी प्राप्त करें और अपने आस-पास पात्र बच्चों को लाभान्वित करने के लिए उचित स्तर पर जानकारी उपलब्ध करवाएं।
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