ऊना, 30 मार्च. अतिरिक्त उपायुक्त महेंद्र पाल गुर्जर ने सोमवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के अंतर्गत गठित समितियों की बैठकें लीं। उन्होंने दोनों अधिनियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
एडीसी ने जिला सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में जातीय भेदभाव की रोकथाम और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय व राहत प्रदान करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी, 2026 तक जिला में 73 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 57 मामले न्यायालय में लंबित हैं। चार मामलों में निर्णय हो चुका है, जबकि सात मामलों में जांच के बाद एससी-एसटी एक्ट की धाराएं हटाई गई हैं और पांच मामलों में पुलिस जांच जारी है।
उन्होंने बताया कि अधिनियम के तहत पीड़ितों को एक लाख रुपये से लेकर 8 लाख 25 हजार रुपये तक की राहत राशि प्रदान करने का प्रावधान है। यह राशि चरणवार तरीके से प्रदान केके जाती है। उन्होंने अधिकारियों को मामलों की नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ितों को समय पर राहत और न्याय मिल सके।

एडीसी ने राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय स्थानीय समिति की बैठक में ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहु-दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के विधिक संरक्षण की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद पात्र व्यक्तियों के लिए स्थायी या सीमित अवधि के विधिक संरक्षक नियुक्त किए जाते हैं। जिले में अब तक 113 स्थायी और 6 सीमित कानूनी संरक्षक नियुक्त किए जा चुके हैं।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि दोनों अधिनियमों के प्रावधानों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित किया जाए और पीड़ितों व दिव्यांगजनों को त्वरित राहत व विधिक संरक्षण उपलब्ध कराने में कोई ढिलाई न बरती जाए।
बैठक में डीएसपी अजय ठाकुर, जिला कल्याण अधिकारी आवास पंडित सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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