नाहन 02 अप्रैल। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सिरमौर डॉ. राकेश प्रताप की अध्यक्षता में आज सीएमओ कार्यालय में गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम(पीसी-पीएनडीटी) के सफल क्रियान्वयन के लिए गठित जिला सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में बताया गया कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य गर्भ धारण से पहले या बाद में लिंग चयन तकनीकों का उपयोग रोकना और कन्या भ्रूण हत्या को रोकना है। अल्ट्रासाउंड या किसी भी अन्य तकनीक के माध्यम से भ्रूण के लिंग का पता लगाने पर पूर्णतया प्रतिबंध है, सभी अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों के लिए इस अधिनियम के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि जिला सिरमौर में 24 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक क्रियाशील है, जिसमें सरकारी क्षेत्र में 8 जबकि 16 निजी क्षेत्र में कार्य कर रहे है।
उन्होंने बताया कि जिला सिरमौर में वर्ष 2025 के दौरान 42 अल्ट्रासाउंड केंद्रों के निरीक्षण किए गए जहां अधिनियम के तहत निर्धारित मापदण्ड पूर्ण पाए गए। उन्होंने बताया कि जिला सिरमौर का वर्तमान में व्यस्क लिंग अनुपात 1000 पुरूष के मुकाबले 923 महिलाएं है, जबकि जन्म के समय लिंग अनुपात 925 है।

उन्होंने बताया कि जिला में जिस पंचायत में लिंग अनुपात बेहतर होता है उसे सरकार द्वारा 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि इन्दिरा गांधी बालिका सुरक्षा योजना के तहत एक बेटी के जन्म के बाद स्थाई परिवार नियोजन करने पर 35 हजार तथा दो बेटियों के जन्म के बाद स्थाई परिवार नियोजन अपनाने पर 25 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है।
बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निसार अहमद, जिला न्यायवादी चंपा सुरेल, डॉ. अमोद, डॉ. दिनेश, डॉ. ईशान शर्मा सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
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