महाकालेश्वर में आस्था का उत्कर्ष—व्यास तट पर जौ विसर्जन से पूर्ण हुई नवरात्रि साधना”

खेतरी’ में दिखता है मां का आशीर्वाद, परंपरा से जुड़कर श्रद्धालु मांगते हैं सुख-समृद्धि

रक्कड़:26मार्च(प्रदीप ठाकुर):चैत्र नवरात्रि की पूर्णाहुति के साथ ही महाकालेश्वर में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है, जब श्रद्धालु व्यास नदी के पवित्र तट पर जौ (खेतरी) का विसर्जन कर मां दुर्गा से सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जा रही है, जो क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है।

नवरात्रि के पहले दिन बोए गए जौ नौ दिनों में हरे-भरे होकर माता रानी की कृपा का प्रतीक बन जाते हैं। इन्हें घर में स्थापित कर पूजा की जाती है और नवरात्रि समाप्त होने पर श्रद्धालु पूरे सम्मान के साथ इन्हें व्यास नदी में प्रवाहित करते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र प्रक्रिया से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा नकारात्मकता दूर होती है।

महाकालेश्वर में इस दौरान व्यास तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। परिवार सहित लोग यहां पहुंचकर ‘खेतरी’ का विसर्जन करते हैं और “जय माता दी” के जयकारों के बीच वातावरण भक्तिमय हो उठता है। मंदिर परिसर और नदी किनारा पूरी तरह आस्था के रंग में रंग जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि किसी कारणवश बहते जल में विसर्जन संभव न हो, तो इन पवित्र जौ को किसी पवित्र स्थान, गमले या बगीचे की मिट्टी में दबाना भी उतना ही शुभ माना जाता है, क्योंकि यह माता रानी का आशीर्वाद स्वरूप होते हैं और इन्हें कभी भी अपमानित नहीं किया जाता।


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