गुरु रविदास के विचार आज भी प्रासंगिक : कैप्टन संजय पराशर

कड़ोआ में गुरु रविदास मंदिर निर्माण की रखी नींव, कैप्टन संजय पराशर ने दिया सवा लाख का सहयोग

रक्कड़ : जसवां-प्रागपुर क्षेत्र के कड़ोआ गांव में संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के आदर्शों और शिक्षाओं को समर्पित नव मंदिर के निर्माण की पहल श्रद्धा, आस्था और सामाजिक समरसता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। कैप्टन संजय पराशर ने गुरू रविदास मंदिर के निर्माण के लिए सवा लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान करते हुए मंदिर निर्माण की नींव रखी। इस अवसर पर वातावरण में श्रद्धा और भक्ति की भावना स्पष्ट रूप से झलक रही थी।


कार्यक्रम के दौरान कैप्टन संजय पराशर ने संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के जीवन, उनके चिंतन और दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु रविदास महाराज केवल एक संत या आध्यात्मिक गुरु ही नहीं थे, अपितु वह संपूर्ण मानव जाति के पथ-प्रदर्शक थे। उन्होंने अपने जीवन और कर्मों के माध्यम से समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियों और रूढ़िवादी परंपराओं को चुनौती दी। उस समय जब समाज जाति-पाति, ऊंच-नीच और भेदभाव की गहरी खाई में बंटा हुआ था, तब गुरु रविदास महाराज ने समानता व प्रेम और मानवता का संदेश देकर लोगों को एकता और समभाव का मार्ग दिखाया।


उन्होंने कहा कि गुरु रविदास महाराज का चिंतन किसी एक जाति, वर्ग या संप्रदाय तक सीमित नहीं था। उनके विचार संपूर्ण मानव समाज के कल्याण और उत्थान के लिए समर्पित थे। यही कारण है कि आज भी उनके संदेश लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। सदियों बाद भी लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। उन्होंने कहा कि आज लगभग 649 वर्ष बाद भी गुरु रविदास महाराज का स्मरण पूरे देश और दुनिया में किया जा रहा है, जो उनके महान व्यक्तित्व और अमर विचारों की महत्ता को दर्शाता है। कैप्टन पराशर ने कहा कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है। यदि समाज में शिक्षा का प्रसार होगा, तो लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और भेदभाव की दीवारें स्वतः कमजोर पड़ जाएंगी। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे गुरु रविदास महाराज की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं और समाज को एक बेहतर दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएं। पराशर ने कहा कि संत रविदास भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे।

उन्होंने सत्य, कर्म और वास्तविकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उस दौर में जब समाज में आडंबर, ढोंग और बाहरी दिखावे का बोलबाला था, तब गुरु रविदास महाराज ने सरल और सारगर्भित शब्दों में लोगों को आत्मशुद्धि और सच्चे आचरण का महत्व समझाया। उनके अमर वचन ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ आज भी लोगों को यह संदेश देते हैं कि सच्ची पवित्रता बाहरी आडंबरों में नहीं, मन की निर्मलता और सदाचार में निहित होती है।


उन्होंने कहा कि यदि हम सभी गुरु रविदास महाराज की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात कर लें, तो समाज से भेदभाव, घृणा और अन्याय जैसी बुराइयों को समाप्त किया जा सकता है। ऐसा समाज ही सच्चे अर्थों में प्रगतिशील और समरस समाज होगा, जहां हर व्यक्ति को समान सम्मान और अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने भी गुरु रविदास महाराज के आदर्शों पर चलने और समाज में भाईचारे व समानता की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में धर्मसाल महंता पंचायत के पूर्व प्रधान बलवंत सिंह ने कहा कि संजय पराशर सामाजिक सरोकारों को निभाने में बड़ी भूमिका अदा कर रहे हैं। इस अवसर पर कड़ोआ गांव से कमल किशाेर, अमरजीत सिंह, सुरेश कुमार, जितेंद्र कुमार, विपिन, पुष्पजीत कौर, नीरू देवी, कांता देवी, कौशल्या कुमारी और वीना देवी भी उपस्थित रहे।


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