राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल प्राथमिकता क्षेत्र में लगभग 9356 करोड़ की संभावित ऋण योजना दस्तावेज़ (Potential Linked Credit Plan – PLP) जिला शिमला की कार्ययोजना पुस्तक का विमोचन उपायुक्त अनुपम कश्यप ने सोमवार को किया।
उपायुक्त ने कहा इस योजना के तहत फसल ऋण, कृषि और संबद्ध गतिविधि के लिये ऋण अवधि तथा कृषि अवसंरचना व अन्य गतिविधियों के साथ निर्यात क्रेडिट, शिक्षा, आवास, सामाजिक आधारित संरचना एवं अन्य ऋण के संभाव्यता का आंकलन किया है।
उन्होंने कहा है कि नाबार्ड द्वारा शिमला जिला के वित्त वर्ष 2024-25 में 8,208.93 करोड़ रुपए के वार्षिक ऋण लक्ष्य के सापेक्ष 6,025.63 करोड़ रुपए की उपलब्धि प्राप्त की गई, जो लक्ष्य का 73.40 प्रतिशत है। इसी वार्षिक ऋण योजना 2024-25 के अंतर्गत क्षेत्रवार प्रदर्शन के अनुसार कृषि क्षेत्र में 62 प्रतिशत, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) क्षेत्र में 93 प्रतिशत तथा समग्र रूप से 73.40 प्रतिशत की उपलब्धि दर्ज की गई।

वित्त वर्ष 2026-27 की PLP के अंतर्गत कृषि क्षेत्र हेतु 5,400.48 करोड़ रुपए और एमएसएमई क्षेत्र हेतु 2,534.08 करोड़ रुपए का ऋण संभावित अनुमान किया गया है। यह संभावित ऋण योजना शिमला जिला में कृषि, उद्यमिता तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।
नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक विवेक अबरोल ने बताया संभाव्यता युक्त ऋण योजना दस्तावेज में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध भौतिक संभाव्यता का बैंक ऋण के माध्यम से दोहन की संभावना का आकलन किया जाता है। अग्रणी जिला प्रबंधक इस संभाव्यता युक्त ऋण प्रणाली के आधार पर अग्रणी बैंक द्वारा अगले वित्तीय वर्ष के लिए जिला का वार्षिक क्रेडिट प्लान आरबीआई के लीड बैंक स्कीम के तहत बनाया जाता है।
उन्होंने बताया कि संभाव्यता युक्त ऋण योजना दस्तावेज़ का निर्माण कृषि, उद्यानिकी सहित विभिन्न कार्यान्वयन विभागों से प्राप्त आँकड़ों एवं सूचनाओं के साथ-साथ पूर्व वर्षों की उपलब्धियों एवं प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। उन्होंने कहा कि बैंकों से अनुरोध किया जाता है कि वह प्राथमिकता क्षेत्र (प्रायोरिटी सेक्टर) में ऋण प्रवाह को प्राथमिकता देते हुए सुनिश्चित करें।
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