जहां उम्मीद टूट चुकी थी, वहां संजय पराशर बने सहारा                                                       -46 परिवारों के लिए राहत की राह, संवेदनशील पहल से बदली तस्वीर


डाडासीबा:
जसवां-प्रागपुर क्षेत्र की अमरोह पंचायत की पटियाल बस्ती और खन्नौड़ मोहल्ले के लिए जाने वाला संपर्क मार्ग बीते कई महीनों से उपेक्षा का शिकार था। गत बरसात ने इस रास्ते की हालत ऐसी कर दी थी कि यह मार्ग किसी जोखिम भरे सफर से कम नहीं रह गया था। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी मिट्टी और फिसलन भरी सतह ने इसे पूरी तरह जर्जर बना दिया था।

इस रास्ते पर निर्भर लगभग 46 परिवार हर दिन इसी कठिन मार्ग से अपने जीवन की जरूरतों को पूरा करने के लिए आने-जाने को मजबूर थे। हालात इतने खराब थे कि चार पहिया वाहनों का पहुंचना तो लगभग असंभव हो गया था और दो पहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता हर पल दुर्घटना का खतरा बन चुका था। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह मार्ग किसी परीक्षा से कम नहीं था, लेकिन उनकी आवाज लंबे समय तक अनसुनी ही रही।


इन परिवारों के मन में कहीं न कहीं यह पीड़ा घर कर गई थी कि उनकी परेशानी को देखने और समझने वाला कोई नहीं है। ऐसे ही हालात के बीच एक उम्मीद की किरण उस समय जगी, जब स्थानीय निवासी राजीव कुमार ने सोशल मीडिया पर कैप्टन संजय पराशर की एक पोस्ट पर अपनी बस्ती की इस समस्या का जिक्र किया।

उन्होंने टिप्पणी के माध्यम से विनम्रता से आग्रह किया कि यदि क्षेत्र में पराशर द्वारा विकास कार्यों की पहल की जा रही है, तो उनके गांव के इस उपेक्षित संपर्क मार्ग की सुध भी ली जाए। यह टिप्पणी उन 46 परिवारों की उम्मीदों और पीड़ा की आवाज थी, जो लंबे समय से किसी मदद की प्रतीक्षा कर रहे थे।

इस टिप्पणी पर संज्ञान लेते हुए कैप्टन संजय पराशर ने जिस संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय दिया, उसने स्थानीय लोगों के मन में एक नया विश्वास जगा दिया। उन्होंने बिना किसी देरी के मात्र तीन दिनों के भीतर अमरोह पंचायत में जेसीबी मशीन उपलब्ध करवाई और अपने निजी खर्च से इस जर्जर मार्ग को ठीक करवाने का कार्य शुरू करवा दिया।

बुधवार और वीरवार को मशीन की गड़गड़ाहट के साथ जब रास्ते की मरम्मत का काम शुरू हुआ, तो स्थानीय लोगों की आंखों में राहत और संतोष साफ झलक रहा था। धीरे-धीरे वह रास्ता, जो कभी भय और असुविधा का प्रतीक बन गया था, अब फिर से जीवन की सामान्य धारा में लौटने लगा। जहां पहले लोग डर-डर कर चलते थे, वहीं अब वाहन सुगमता से गुजरने लगे हैं।


कैप्टन संजय पराशर के इस मानवीय और संवेदनशील कार्य के लिए स्थानीय लोगों ने दिल से आभार व्यक्त किया है। पूर्व वार्ड पंच तृप्ता देवी, राजीव कुमार, रणजीत सिंह, अश्वनी कुमार, सुखदेव सिंह, अवतार सिंह, कर्म चंद, राकेश कुमार, शर्मिला देवी, सुषमा, सरोज कुमारी, दर्शना और कुसुम सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से वे इस समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि कैप्टन संजय पराशर ने जिस तत्परता और संवेदनशीलता के साथ उनकी समस्या को समझा और उसका समाधान किया, वह उनके लिए केवल मदद नहीं, बल्कि एक भरोसे की पुनर्स्थापना है।


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