हमीरपुर
उपायुक्त अमरजीत सिंह ने शुक्रवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से संबंधित चार अलग-अलग जिला स्तरीय समितियों की बैठक की अध्यक्षता करके विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रहे जिला के करीब 53 हजार लोगों की ई-कल्याण ऐप पर ई-केवाईसी आरंभ की गई है और यह कार्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से किया जा रहा है। अभी तक करीब 35 हजार पेंशनधारकों की ई-केवाईसी हो चुकी है।
31 अगस्त तक सभी पेंशनधारकों की ई-केवाईसी सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी एवं फील्ड कर्मचारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने सभी पेंशनधारकों से भी अपनी ई-केवाईसी सुनिश्चित करने की अपील की।

प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि वर्ष 2022-23 में इस योजना के तहत चयनित जिला के पांचों गांवों दड़ूही, दरोगण पत्ती कोट, मालग, महारल और धीरड़ में सभी कार्य 15 सितंबर तक पूरे हो जाने चाहिए। इसके लिए सभी पंचायत प्रधान और सचिव तेजी से कार्य करें और संबंधित तहसील कल्याण अधिकारी लगातार इनकी प्रगति रिपोर्ट लेकर इसकी ऑनलाइन अपलोडिंग करवाएं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में इसी योजना के तहत जिला के 16 अन्य गांवों लाहड़, खग्गल, उखली, भगेटू, नाहलवीं, दियोट, नाड़सीं, सराहकड़, धबीरी, कलौहण, कश्मीर, बटराण, घलूं, फाहल खास, बटराण खुर्द और चठियार का चयन किया गया है। लेकिन, इनमें से कुछ गांवों के नगर निकायों में शामिल होने से इस सूची में संशोधन किया जा सकता है।
हाथ से मैला उठाने वाले सफाई कर्मचारियों के नियोजन प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम-2013 के अंतर्गत जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में उपायुक्त ने शहरी निकायों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सफाई कर्मचारियों को सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों के पास सभी आवश्यक उपकरण एवं सुरक्षा किट होनी चाहिए तथा इनके स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच की जानी चाहिए।
उपायुक्त ने मानसिक मंदता, ऑटिज्म, सेरीब्रल पाल्सी और बहु-विकलांगता के शिकार व्यक्तियों के कल्याण के लिए बनाए गए राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 के अंतर्गत स्थानीय समिति की बैठक की अध्यक्षता भी की। इस बैठक में 2 दिव्यांगों के लिए कानूनी संरक्षकों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उपायुक्त ने बताया कि इस तरह की विकलांगताओं के शिकार 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों के माता-पिता स्वभाविक रूप से ही उनके संरक्षक होते हैं।
लेकिन, 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद ऐसे लोगों के लिए कानूनी संरक्षकों की नियुक्ति आवश्यक होती है, ताकि ये अधिकृत संरक्षक दिव्यांगजनों की ओर से सभी आवश्यक औपचारिकताएं को पूर्ण कर सकें। जिला में अभी तक 202 दिव्यांगों के कानूनी संरक्षण बनाए जा चुके हैं।
इन बैठकों में जिला कल्याण अधिकारी चमन लाल शर्मा ने विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान एडीसी अभिषेक गर्ग और अन्य विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे
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