कुल्लू,
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग तथा हिमाचल प्रदेश भू-अभिलेख विभाग के संयुक्त तत्वावधान में भारत में भूमि प्रशासन में आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुक्रवार को मनाली में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में देश के 24 राज्यों से 75 प्रतिनिधियों सहित विभिन्न प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

इस अवसर मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग के सचिव मनोज जोशी ने बताया कि भारत सरकार के सौजन्य से आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लैंड रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन, ऑनलाइन सेवाओं और आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि देशभर से आए वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों में किए जा रहे कार्यों और अनुभवों को साझा किया, जिससे एक-दूसरे राज्यों के लिए सीख और सुधार के नए मार्ग खुले हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन सर्वे, डिजिटल मैपिंग, जीआईएस आधारित रिकॉर्ड प्रणाली से भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य हो रहे हैं। भारत सरकार लैंड रिकॉर्ड्स के डिजिटल रूपांतरण के लिए शत-प्रतिशत सहायता उपलब्ध करवा रही है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में ऑनलाइन पेपरलेस रजिस्ट्रेशन, रेवेन्यू कोर्ट्स का ऑनलाइन सिस्टम सहित कई सराहनीय परिवर्तन लागू किए गए हैं। ऑनलाइन सेवाएं शुरू होने से आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे, जिससे इनकी पेंडेंसी भी कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।

प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) कमलेश कुमार पंत ने कहा कि भूमि मामलों को जटिल और समय लेने वाला माना जाता है, ऐसे में आधुनिक तकनीक आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों के सफल मॉडल्स और अच्छी प्रथाओं को साझा करना है, जिससे अन्य राज्यों को भी सीख मिले और आम जनता को तेज, सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
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