अध्यापक प्रशिक्षण एवं समग्र पाठ्यक्रम गुणवत्तायुक्त शिक्षा का आधार – रोहित ठाकुर                                     एस.सी.ई.आर.टी. सोलन में समीक्षा बैठक आयोजित


शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सभी छात्रों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए यह आवश्यक है कि अध्यापकों का प्रशिक्षण एवं पाठ्यक्रम उच्च स्तर के हो। इस दिशा मेें राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद तथा ज़िला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। रोहित ठाकुर आज यहां राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एस.सी.ई.आर.टी.) सोलन में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।


बैठक में हिमाचल प्रदेश के समृद्ध इतिहास एवं संस्कृति को विद्यालय पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने, एस.सी.ई.आर.टी. के कार्य का समग्र अवलोकन तथा प्रगति कार्ड एवं परख विस्तृत रिपोर्ट समीक्षा प्रस्तुति की गई।


शिक्षा मंत्री ने कहा कि अध्यापकों के प्रशिक्षण को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाकर, आधुनिक पठन-पाठन सामग्री अपनाकर तथा तकनीक के माध्यम से शत-प्रतिशत गुणवत्तायुक्त शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इस दिशा में एस.सी.ई.आर.टी. एवं डाईट की भूमिका अहम है।


उन्होंने कहा कि तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक निर्णायक सुधार लागू किए हैं। इनके सकारात्मक परिणाम सामने हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता के आकलन में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार करते हुए पांचवां स्थान प्राप्त किया है। पूर्व में हम 21वें स्थान पर थे।

यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामूहिक परिश्रम के साथ-साथ प्रदेश सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का परिणाम है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि एस.सी.ई.आर.टी. सोलन इस परिवर्तनकारी यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पठन-पाठन सामग्री और मूल्यांकन प्रक्रियाओं की व्यवस्थित अधोसंरचना उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि छात्रों के संपूर्ण विकास के लिए प्रत्येक स्तर पर उचित विषय सामग्री उपलब्ध हो।


रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। स्वतंत्रता के समय की 7 प्रतिशत की प्रदेश की साक्षरता दर अब बढ़कर 99.03 प्रतिशत हो गई है। प्रदेश सरकार ने सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मक सुधार किए हैं। इन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा रहा है।


उन्होंने कहा कि संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए क्लस्टर स्कूल प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत 300 से 500 मीटर की परिधि में स्थित विद्यालयों को एक क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है।

इस मॉडल ने पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल सामग्री और शिक्षकों की विशेषज्ञता का साझा उपयोग संभव बनाया है। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच और सीखने के अनुभव में सुधार हुआ है। और बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए सीबीएसई पाठ्यक्रम स्कूलों के लिए विशेष कॉडर बनाया जा रहा है।


समीक्षा बैठक में हिमाचल प्रदेश के समृद्ध इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में एकीकृत करने के लिए गौरवशाली स्थानीय संस्कृति, साहित्य, कला, प्राचीन मंदिरों, किलों और प्रजामण्डल एवं पझौता आंदोलन जैसे स्वतंत्रता संग्राम के विषयों को शामिल करने पर विशेष बल दिया गया।


बैठक में निर्णय लिया गया कि संस्कृति तथा साहित्य की जानकारी के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम तथा स्वतंत्रता उपरांत अपनी वीरता के माध्यम से देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले वीरों की विस्तृत जानकारी भी पाठ्यक्रम में सम्मिलित की जाएगी ताकि युवा पीढ़ी इस जानकारी के माध्यम से प्रोत्साहित हो सके।

पाठ्यक्रम में प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों, लोक कलाओं और महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ-साथ हिमाचल पर केन्द्रित प्रागैतिहासिक काल से लेकर हिमाचल के राज्य बनने तक की सारगर्भित जानकारी भी होगी।   राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद सोलन की प्राचार्य रीतू शर्मा सोनी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।


हिमाचल प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा आयोग के अध्यक्ष सर्वजोत सिंह बहल, प्रदेश शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, हि.प्र. स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अमरजीत शर्मा, अतिरिक्त निदेशक स्कूल शिक्षा बी.आर. शर्मा सहित शिक्षा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।


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