जिला बाल संरक्षण इकाई ने महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य विभागों के सहयोग से वीरवार को हमीरपुर के निकटवर्ती गांव कुठेड़ा में एक जागरुकता शिविर आयोजित किया। इस शिविर में सैनिक कल्याण विभाग के उपनिदेशक स्क्वाड्रन लीडर (सेवानिवृत्त) मनोज राणा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
इस अवसर उन्होंने बताया कि भूतपूर्व सैनिकों और सेवारत सैनिकों के बच्चों को विभाग की ओर से कई सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

पात्र परिवारों को इन योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए।इससे पहले मुख्य अतिथि, अन्य वक्ताओं तथा सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए जिला बाल संरक्षण अधिकारी तिलक राज आचार्य ने बताया कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा तथा विपरीत परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के कल्याण के लिए जिला में सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चांे के अधिकारों की रक्षा के लिए किशोर न्याय अधिनियम में बहुत ही कड़े प्रावधान किए गए हैं। यह अधिनियम बच्चों की देखभाल और संरक्षण से संबंधित कानूनों का एक समूह है। इसका मुख्य उद्देश्य विधि से संघर्षरत बच्चों और देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए न्याय सुनिश्चित करना, उनके पुनर्वास, उपचार और विकास पर ध्यान केंद्रित करना है।

शिविर के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक अक्षित चौहान ने महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित विभिन्न योजनाओं और अधिनियमों की जानकारी दी। हैड कांस्टेबल सुरजीत कुमार, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की पैनल अधिवक्ता स्नेह लता, जिला बाल कल्याण समिति की सदस्य संगीता, चाइल्ड लाइन संस्था की जिला समन्वयक मनोरमा लखनपाल और अन्य अधिकारियों ने भी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम, घरेलू हिंसा रोधी अधिनियम, बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया, चाइल्ड लाइन सेवा और अन्य योजनाओं एवं अधिनियमों की विस्तृत जानकारी दी।
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