हिमाचल किसान सभा के नेतृत्व में तहसील खुंडियां में किसानों ने वन अधिकार अधिनियम एफ आर ए 1980 में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ उनको पुश्तैनी कब्जों से बेदखल किए जाने के विरोध में किया जोरदार प्रदर्शन






मिलाप कौशल खुंडियां



हिमाचल किसान सभा के नेतृत्व में सोमवार को चंगर क्षेत्र की खुड़ियाँ तहसील में किसानों ने वन अधिकार अधिनियम एफ आर ए 1980 में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ तथा किसानों को उनके पुश्तैनी कब्जों से बेदखल किए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया।


इस प्रदर्शन का नेतृत्व हिमाचल किसान सभा के जिला सचिव सतपाल सिंह, किसान सभा के पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक कटोच तथा चंगर क्षेत्र की विभिन्न किसान कमेटियों के नेताओं सुभाष, कामरेड किशोरी लाल, देश राज, ज्ञान सिंह, आशा देवी, अनुराधा, कांता देवी, फुलां, कामरेड रतन चंद, धनी राम आदि ने किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों, महिलाओं और ग्रामीणों ने भाग लिया।


प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि एफ आर ए 1980 में संशोधन किया जाए जिस से 5 बीघा  तक  के  क्ब्जों को  नियमित  करने  का  रास्ता  साफ  हो। किसानों और ग्रामीणों के हितों के खिलाफ हैं। 

सरकार  कोर्टों  के  फैसलों की आड़ में  वर्षों से पुश्तैनी तौर पर खेती कर रहे या  घर  बना  कर  रह  रहे  किसानों को उनकी जमीनों से बेदखल करने का  प्रयास कर  रही है जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि किसान अपनी पुश्तैनी जमीनों पर पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं और अब उन्हें अवैध कब्जेदार घोषित किया जा रहा है, जो सरासर अन्याय है।


सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रशासन ने किसानों की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो किसान सभा आंदोलन को और तेज करेगी।
इसमें मुख्य मांगें रखी गई जिसमें वन अधिकार अधिनियम एफ आर ए 1980 में प्रस्तावित सभी किसान-विरोधी संशोधनों को तुरंत वापस लिया जाए।किसानों को उनके पुश्तैनी कब्जों से बेदखल करने की सभी कार्रवाइयां तुरंत रोकी जाएँ।


चंगर क्षेत्र सहित पूरे क्षेत्र में किसानों के पुश्तैनी भूमि अधिकारों को कानूनी मान्यता दी जाए।जिन किसानों के एफ आर ए के तहत दावे लंबित हैं, उनका शीघ्र और निष्पक्ष निपटारा किया जाए।बिना वैकल्पिक व्यवस्था के किसी भी किसान को भूमि से बेदखल न किया जाए।किसानों पर की जा रही प्रशासनिक दमनात्मक कार्रवाइयों को बंद किया जाए।


किसान संगठनों से बातचीत कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।स्मार्ट मीटर योजना  को  बापिस  लिया जाए।
प्रदर्शन के अंत में किसानों ने एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया और सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को जिला व राज्य स्तर तक फैलाया जाएगा।


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