ज्वाली
दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन कृषि रबी अभियान 2025 नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ, जिसका मुख्य विषय कृषि सुधार, किसान कल्याण और नीति कार्यान्वयन पर रहा। प्रमुख परिणामों में फसल बीमा को सशक्त बनाना, नकली इनपुट्स के खिलाफ कार्रवाई करना, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) को मजबूत बनाना और 3 अक्टूबर से विकसित कृषि संकल्प अभियान की शुरुआत शामिल थी।
राष्ट्रीय राजधानी में 16 सितंबर 2025 को केंद्रीय कृषि मंत्री एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में यह सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में देशभर के कृषि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने आगामी रबी सत्र के लिए कृषि रणनीतियों को सुदृढ़ करने हेतु केंद्रित विचार-विमर्श में भाग लिया।
इस दौरान अपने भाषण में कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार जी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विभिन्न एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में विभाजित है। सभी फसलों की अलग-अलग जलवायु आवश्यकताएं होती हैं, इसलिए सूक्ष्म स्तर तक योजनाएं बनाई जानी चाहिए ताकि योजनाएं प्रभावी रूप से लागू हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को परिशुद खेती (Precision Farming) से जोड़ना आवश्यक है।
प्रदेश की कृषि जलवायु नकदी फसलों के उत्पादन हेतु अति उत्तम है। इसी के संदर्भ में मंत्री ने किसानों की आय बढाने के लिए व्यवसायिक खेती की दिशा में बढ़ने पर जोर दिया। हिमाचल प्रदेश इसके लिए आलू, लहसुन, फलदार फसलें, हल्दी और प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मार्केटिंग लिंकेज पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने माननीय केंद्रीय कृषि मंत्री से अनुरोध किया कि कालका से किसान ट्रेन चलाई जाए, जिससे किसान अपनी फसलें साथ लगते बाजार में सही समय पर पहुंचा सकें और ट्रांसपोर्ट लागत में भी कमी लाई जा सके। साथ ही, केंद्र सरकार से यह भी आग्रह किया कि प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित किया जाए, ताकि जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने बताया कि प्रदेश पहले से ही प्राकृतिक खेती की दिशा में अग्रसर है। प्रदेश भारत का पहला राज्य है जिसने प्राकृतिक खेती द्वारा उगाये गये उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है. जिसमें मक्की की खरीद के लिए 40 रूपये, गेहूं के लिए 60 रूपये प्रति किलो, कच्ची हल्दी के लिए 90 रूपये प्रति किलो व जौ के लिए 60 रूपये प्रति किलो।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री से यह भी अनुरोध किया गया कि मृदा सर्वेक्षण सूक्ष्म स्तर तक किया जाए। इसके अतिरिक्त, खंड स्तर पर मृदा उर्वरता मानचित्र तैयार किए जाने चाहिए, ताकि उनकी जानकारी के आधार पर वैज्ञानिक एवं प्रभावी भूमि उपयोग योजना बनाई जा सके। उन्होंने रिमोट सेंसिंग के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि आज के परिवेश में कृषि क्षेत्र में रिमोट सेंसिंग का व्यापक उपयोग करने की आवश्यकता है।
यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच एकजुटता से भारतीय कृषि के समग्र विकास और उसके किसानों के कल्याण हेतु मिलकर कार्य करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुआ।
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