मंडी,
छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के पावन अवसर पर साहित्य चूड़ामणि पंडित भवानीदत्त शास्त्री की स्मृति में बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन संस्कृति सदन के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में मंडलायुक्त मंडी आर.के. पुर्थी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, जबकि जिला भाषा अधिकारी रेवती सैणी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता रूपेश्वरी शर्मा ने की।

भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। अपने संबोधन में मंडलायुक्त ने साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कवि सम्मेलन समाज को दिशा देने और संवेदनाओं को जागृत करने का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजनों से सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिलती है।

कविता मन की बात व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है। यह हमारे दैनिक जीवन की भावनाओं, अनुभवों और समस्याओं को सरल व प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। जब इन्हीं विषयों को हास्य और व्यंग्य के साथ पिरोया जाता है, तो कविता और भी अधिक आकर्षक, रोचक और लोकप्रिय बन जाती है।

कार्यक्रम की शुरुआत गीता श्रेणी महिला टीम द्वारा मंडयाली गीता पाठ की प्रभावशाली प्रस्तुति से हुई। मंच संचालन पवन चौहान ने कुशलतापूर्वक किया।कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर डॉ. मनोहर अनमोल, हरपिंदर कौर, राजेंद्र सिंह ठाकुर, डॉ. पी.सी. कौंडल, यशपाल सिंह राठौर, सुरेंद्र मिश्रा, भीम सिंह, कुसुम, दिनेश सूद, हरि प्रिया, पुष्पा मल्होत्रा, रतना, निरंजना, कामना मल्होत्रा, उमेश शर्मा, भारत शर्मा, जगदीश कपूर, सुरेंद्र पाल वैद्य, उत्तम चंद शर्मा, लतेश कुमार शर्मा, मुरारी शर्मा, पवन चौहान, प्रकाश चंद धीमान, अर्चना धीमान, सारिका बोहरा, निर्मला चंदेल, सविता कुमारी, पौमिला ठाकुर, किरण गुलेरिया, विनोद गुलेरिया, वेद कुमार, दीप कुमार, विद्या शर्मा, चंपा देवी, राघव जोशी, जया वैद्या, हरिंद्र मल्होत्रा, जया कपूर, नालिनी वैद्या, सुष्मा कपूर, चंपा शर्मा, प्रो. राकेश कपूर, रोमिता शर्मा, अजय कुमार, दक्षा उपाध्याय, अनिल महंत, आर.के. गुप्ता, बबली कुमारी, सरिता शर्मा, जितेश शर्मा, कुलदीप गुलेरिया तथा भूपेंद्र सिंह ठाकुर सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर प्रस्तुत कविताओं ने उपस्थित जनसमूह की खूब सराहना बटोरी। शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम साहित्य, संस्कृति और भक्ति का सजीव संगम बनकर उभरा।
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