मंडी,
हिमाचल प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण तथा विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के उद्देश्य से आज जिला मंडी में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने की। यह बैठक पशुपालन विभाग के सहयोग से संपन्न हुई। बैठक की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि प्रदेश सरकार दूध उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और यह किसानों की आजीविका से जुड़ा विषय है।
इसलिए सभी लाइन विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों तक योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए नवीन तकनीकों को अपनाया जाए तथा फील्ड स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि दूध खरीद को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री का विशेष सहयोग मिल रहा है। मिल्कफेड की अपनी सीमाएं हैं, इसलिए अब दूध को अधिक से अधिक बाजार से जोड़ने पर काम करना होगा और इस दिशा में हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
बैठक में उप निदेशक पशुपालन मंडी डॉ. मुकेश महाजन ने विभाग की गतिविधियों का अवलोकन प्रस्तुत करते हुए पशुपालन क्षेत्र की दृष्टि एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. दीप कुमार ठाकुर ने पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम और टीकाकरण अभियानों की विस्तृत जानकारी साझा की।

डॉ. प्रतीक कश्यप ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी दी, जिनका उद्देश्य देशी नस्लों का संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना है। इसी क्रम में डॉ. निशांत ठाकुर ने विभाग की वर्तमान योजनाओं और किसानों के उत्थान हेतु चल रही गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
बैठक में जिला पंचायत अधिकारी अंचित डोगरा, मिल्कफेड चक्कर, मत्स्य पालन एवं सहकारिता विभाग के अधिकारी, वेटनरी डॉक्टर तथा दूध उत्पादक भी उपस्थित रहे। बैठक का समापन इस आह्वान के साथ हुआ कि मंडी जिले में पशुपालन क्षेत्र का आधुनिकीकरण कर किसानों की आजीविका को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की जाएगी।
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