एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की मदद से पंडोह से पटीकरी तक की जा रही लापता लोगों की तलाश



सराज के थुनाग उपमंडल में भारी बारिश व भूस्खलन की आपदा के उपरांत राहत कार्य जारी हैं। इंसिडेंट कमांडर थुनाग एवं अतिरिक्त निदेशक पंचायतीराज विभाग सुरेंदर मोहन ने आज थुनाग में बताया कि एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की 18 लोगों की एक सर्च टीम पंडोह डैम से पटीकरी तक ड्रोन के माध्यम से बाढ़ में लापता लोगों को ढूंढ़ रही है।


उन्होंने बताया कि पटिकरी डैम से बाखली खड्ड में जंजैहली व थुनाग की तरफ को 18-18 लोगों की दो टीमों ने सर्च अभियान चलाया है। उन्होंने बताया कि दूरदराज पंचायत पखरैर के विभिन्न गांवों के प्रभावित लोगों को आईटीबीपी की दो टीम पोर्टर व पटवारियों द्वारा राशन किट, तिरपाल, हाईजीन किट व दवाईयां पहुंचाई गईं।


इंसिडेंट कमांडर सुरेंदर मोहन ने बताया कि होमगार्ड के 23 जवानों की एक टीम ने पोर्टर के साथ ग्राम पंचायत चिऊणी में राशन किट, तिरपाल, हाईजीन किट व दवाईयां पहुंचाईं। इसके अलावा मुरहाग के सूरह गांव में अग्निश्मन विभाग के 6 लोगों की टीम ने राहत सामग्री पहुंचाई।

उन्होंने बताया कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला थुनाग व लोक निर्माण विभाग रेस्ट हाउस थुनाग में राहत शिविर में लगभग 300 लोगों को ठहराया गया है तथा उनकी खाने-पीने की भी पूरी व्यवस्था की गई है। अन्य लोगों के लिए न्यू बस स्टैंड व मिनी सचिवालय में संस्थाओं द्वारा लंगर की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि थुनाग से जंजैहली सड़क को अब तक लम्बाथाच तक खोला गया है।

जंजैहली तक पहुंचने के लिए सभी सड़कों पर पुरजोर कार्य चल रहा है। इसके अतिरिक्त पखरैर सड़क को खोलने के लिए भी एक एलएनटी मशीन लगाई गई है। उन्होंने बताया कि लोगों के लिए प्रत्येक गांव में आशा वर्कर व आंगनबाड़ी वर्कर के माध्यम से जरूरी दवाईयां पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने स्थानीय लोगों से आह्वान किया कि पानी को उबालकर व क्लोरिनेशन के बाद ही पियें तथा स्वास्थ्य का ध्यान रखें। 

इस मौसम में दूषित पानी से पीलिया और दस्त रोग इत्यादि का खतरा रहता है। ऐसे में पीने के पानी को कम से कम 3 से 4 मिनट तक उबालें, इससे पीलिया और दस्त के कीटाणु खत्म हो जाते हैं। अपने पास ओआरएस रखें और दस्त लगने की स्थिति में मरीज को ओआरएस पीने की सलाह दें। अपने नजदीकी पानी के स्रोतों को साफ करें वह पंचायत और आईपीएच के कर्मचारी व अधिकारियों को पानी में ब्लीचिंग पाउडर डालने को कहें। किसी भी प्रकार की आपदा को तुरंत अपने स्वास्थ्य अधिकारी को बताएं।


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