मिलाप कौशल खुंडियां
ज्वालामुखी क्षेत्र में परंपरा, संस्कृति और खेल भावना का अद्भुत संगम एक बार फिर देखने को मिलेगा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी टिहरी रोड स्थित धुईयां दी बां मैदान में लखदाता पीर छिंज मेले का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन 14 फरवरी को पूरे उत्साह और धूमधाम के साथ किया जा रहा है। जिसमें की मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर शिरकत करेंगे।
इस भव्य दंगल मेले में भारत के विभिन्न राज्यों से नामचीन और अनुभवी पहलवान अपनी कुश्ती कला का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही इस बार मेले को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देते हुए ईरान और नेपाल से भी मशहूर पहलवानों के आने की पुष्टि हो चुकी है, जिससे दर्शकों को उच्च स्तर की रोमांचक कुश्तियां देखने का अवसर मिलेगा।

दंगल मेले के कार्यक्रम संयोजक एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रमजान खान ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन केवल कुश्ती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह मेला खेल, संस्कृति, मनोरंजन और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनेगा। मेले की गरिमा को बढ़ाने के लिए विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक एवं गणमान्य व्यक्तित्वों की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जा रही है।
मनोरंजन के क्षेत्र में भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेगा। मेले में पंजाबी, हिमाचली तथा कश्मीरी लोक और लोकप्रिय गायकों की शानदार प्रस्तुतियां होंगी, जो पूरे माहौल को संगीतमय और उत्सवमय बना देंगी। संगीत प्रेमियों के लिए यह आयोजन यादगार बनने वाला है।
दंगल मेले में भाग लेने वाले पहलवानों के लिए कुल इनामी राशि ₹5,00,000 (पांच लाख रुपये) रखी गई है, जिससे खिलाड़ियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। दंगल का शुभारंभ सुबह 11:00 बजे से किया जाएगा और मुकाबले देर शाम तक चलेंगे।
दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मेला मैदान में वाहनों की पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का समुचित प्रबंध किया गया है, ताकि दूर-दराज़ से आने वाले दर्शकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आयोजकों ने समस्त प्रदेशवासियों, खेल प्रेमियों एवं क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस भव्य दंगल मेले में शामिल हों, पहलवानों का उत्साहवर्धन करें और ज्वालामुखी की सांस्कृतिक परंपरा को और सशक्त बनाएं।
यह सातवां दंगल मेला न केवल खेल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा, बल्कि यह आयोजन ज्वालामुखी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का कार्य करेगा।
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