हिमाचल में निराश्रितों के लिए ‘सरकार ही परिवार’*                                                   सीएम सुक्खू के मानवीय दृष्टिकोण की मिसाल है ‘मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना’*


ऊना,

हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना पूरे देश में सामाजिक सुरक्षा का एक ऐसा उम्दा मॉडल बन चुकी है, जिसने हजारों ज़िंदगियों को सम्मान, सुरक्षा और नया जीवन आधार दिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मानवीय दृष्टिकोण से उपजी इस योजना ने अभिभावक-विहीन बच्चों, निराश्रित महिलाओं और असहाय बुजुर्गों को केवल मदद नहीं, बल्कि जीवन को सशक्त बनाने वाला मजबूत आधार प्रदान किया है।

पिछले दो वर्षों में लगभग 64 करोड़ रुपये के व्यय के साथ यह योजना सामाजिक सुरक्षा का एक ठोस ढांचा खड़ा कर चुकी है, जो सरकार की संवेदनशीलता का जीवंत प्रमाण है।वहीं, ऊना जिला में बीते दो वर्षों में योजना के विभिन्न प्रावधानों के तहत लगभग पौने 4 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता जारी की गई है, जिसने निराश्रित बच्चों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार दिया है।


*राज्य सरकार का अनूठा मानवीय मॉडल : ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’*
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच के अनुरूप 28 फरवरी 2023 को आरंभ की गई मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने अनाथ बच्चों को संस्थागत संरक्षण देते हुए उन्हें “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” का कानूनी दर्जा प्रदान किया है। प्रदेश में लगभग 6,000 निराश्रित बच्चों को यह दर्जा दिया गया है, और सरकार उनकी 27 वर्ष की आयु तक संपूर्ण देखभाल की जिम्मेदारी निभा रही है।


योजना उन सभी बच्चों को कवर करती है जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इसमें अनाथ, अर्ध-अनाथ, विशेष रूप से सक्षम बच्चे और वे बच्चे जो विधिक संरक्षण के अधीन आए हैं, उन्हें कवर किया गया है।


*समाज के कमजोर वर्गों तक बढ़ता दायरा*
समावेशन की दृष्टि से योजना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। असहाय बुजुर्गों, ट्रांसजेंडर समुदाय, परित्यक्त या सरेंडर किए गए बच्चों और एकल नारियों को भी इस योजना में शामिल किया है, जिससे उन्हें स्थायी आर्थिक सहारा दिया जा सके और वे सम्मानजनक जीवन जिएं।


इसी उद्देश्य को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष’ स्थापित किया है, जिसमें सरकारी अंशदान के साथ-साथ आम जनता, सामाजिक संस्थाओं और कंपनियों का सहयोग भी शामिल किया जा रहा है, जिससे इन बच्चों की उच्च शिक्षा और अन्य जरूरतों को पूरा किया जा सके।


*शिक्षा और परवरिश की संपूर्ण ज़िम्मेदारी सरकार की*
योजना का मूल भाव यह है कि जिन बच्चों का कोई नहीं है, उनकी संपूर्ण परवरिश, शिक्षा, भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य, आवास, सबकी जिम्मेदारी राज्य सरकार निभाएगी।


इसी उद्देश्य से प्रत्येक बच्चे को 4,000 रुपये मासिक पॉकेट मनी प्रदान की जा रही है। बाल संरक्षण संस्थानों में रह रहे 14 वर्ष तक के बच्चों के खातों में 1,000 रुपये, जबकि 15 से 18 वर्ष तक के बच्चों के खातों में 2,500 रुपये प्रति माह जमा किए जाते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को, यदि छात्रावास सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो सरकार की ओर से 3,000 रुपये प्रतिमाह किराए का प्रावधान किया गया है, ताकि कोई भी बच्चा अपने सपनों से वंचित न रहे।


सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान का मजबूत गठजोड़, आत्मनिर्भर युवा बनाने में सहयोग
मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना केवल संरक्षण का कवच नहीं, बल्कि युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त संकल्प है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को स्वयं का स्टार्टअप शुरू करने के लिए 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है। अभी तक 84 युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने हेतु यह सहयोग राशि प्रदान की जा चुकी है।


वहीं, जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) ऊना, नरेंद्र कुमार बताते हैं कि जिला में योजना ने बच्चों के लिए सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन, तीनों ही क्षेत्रों में ठोस परिणाम दिए हैं। सामाजिक सुरक्षा मदद में 294 बच्चों को 2 करोड़ 27 लाख 56 हजार 628 रुपये प्रदान किए गए, जिससे उन बच्चों के जीवन में बुनियादी स्थिरता आई है जो पहले किसी प्रकार के सहारे से वंचित थे।

उच्च शिक्षा के लिए 60 छात्रों को 26 लाख 44 हजार 814 रुपये और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 35 युवाओं को 7 लाख 99 हजार 471 रुपये उपलब्ध कराए गए। कोचिंग सहायता के अंतर्गत 2 विद्यार्थियों को 1 लाख 48 हजार रुपये, स्किल डेवलपमेंट के लिए एक युवक को 98 हजार रुपये और माइक्रो एंटरप्राइज शुरू करने हेतु 9 युवाओं को 13 लाख 20 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई।


नरेंद्र कुमार कहते हैं कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच के अनुरूप विभाग का प्रयास केवल बच्चों को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे जीवन में किसी भी अवसर से वंचित न रहें।राज्य सरकार इन बच्चों और युवाओं को देशभर में शैक्षणिक भ्रमण और एक्सपोज़र विजिट पर भी भेज रही है, जिसका पूरा व्यय सरकार वहन करती है।


योजना के अंतर्गत विवाह के लिए 2 लाख रुपये की सहायता का भी प्रावधान है, जिसके तहत अब तक 264 लाभार्थियों को राशि प्रदान की गई है। वहीं, पात्र लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए 3 बिस्वा भूमि और 3 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है, जिससे 423 लाभार्थियों को अब तक लाभ मिल चुका है।


इसके अतिरिक्त, 10,000 रुपये का वार्षिक वस्त्र अनुदान और 500 रुपये का उत्सव भत्ता, इस योजना को मानव गरिमा और जीवन-सम्मान को केंद्र में रखने वाली एक व्यापक सामाजिक पहल बनाते हैं।


*आधुनिक सुविधाओं का नया घर होगा 132 करोड़ का ‘मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सुख-आश्रय परिसर’*
योजना के सुदृढ़ीकरण के तहत कांगड़ा जिले के लुथान में 132 करोड़ रुपये की लागत से ‘मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सुख-आश्रय परिसर’ का निर्माण किया जा रहा है।


यह देश का एक अनूठा परिसर होगा, जिसमें 400 आश्रितों के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित आवास, शिक्षा, कौशल विकास केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं, पुस्तकालय तथा मनोरंजन के सभी आवश्यक साधन उपलब्ध होंगे। यह परिसर भविष्य में राज्य की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का मॉडल संस्थान बनेगा।


*‘सरकार ही परिवार’… मुख्यमंत्री सुक्खू का मानवीय दृष्टिकोण*
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का स्पष्ट कहना है कि जिन बच्चों का कोई सहारा नहीं है, उनके लिए सरकार ही परिवार है। इसी दृष्टि से सरकार माता-पिता की भूमिका भी निभा रही है। भोजन से लेकर वस्त्र, शिक्षा से लेकर कोचिंग, स्वास्थ्य से लेकर आवास तक, वह सब कुछ जो एक परिवार अपने बच्चों को देता है, राज्य सरकार उपलब्ध करा रही है।


मुख्यमंत्री के मानवीय दृष्टिकोण ने हिमाचल प्रदेश को ऐसे राज्य के रूप में स्थापित कर दिया है जहां सरकार जन हित को सर्वोपरि रख कर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से समाज के सबसे कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही है।


*जिला में पात्र बच्चों तक योजना का लाभ पहुंचाना प्रशासन की प्रतिबद्ध*
उपायुक्त ऊना जतिन लाल का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रशासन पारदर्शिता, त्वरित सहायता और विभागीय समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना से वंचित न रहे।


Discover more from Newshimachal24

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Discover more from Newshimachal24

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading