CBSE का ताज लगा तो बदली तस्वीर: गरली बाल स्कूल में एडमिशन के लिए मची होड़।

पहले ही दिन 153 दाखिले, निजी स्कूल छोड़ सरकारी स्कूल की ओर बढ़ा रुझान

प्रदीप ठाकुर

रक्कड़: 3अप्रैल : राजकीय बाल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गरली में इस बार नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत ने इतिहास रच दिया। जैसे ही स्कूल को सीबीएससी बोर्ड का दर्जा मिला, वैसे ही एडमिशन के लिए अभिभावकों की लंबी कतारें लग गईं। हालात यह रहे कि पहले ही दिन बाल वाटिका से प्लस टू तक 153 विद्यार्थियों ने दाखिला लेकर स्कूल के प्रति बढ़ते भरोसे की मजबूत तस्वीर पेश कर दी।

विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिरुद्ध शर्मा ने बताया कि सबसे ज्यादा उत्साह छोटे बच्चों के दाखिले को लेकर देखने को मिला। बाल वाटिका वन, टू और थ्री में ही पहले दिन 22 नए एडमिशन दर्ज किए गए, जो इस बात का संकेत है कि अभिभावक अब शुरुआती शिक्षा के लिए भी इस स्कूल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

CBSE से जुड़ने के बाद स्कूल की साख में जबरदस्त इजाफा हुआ है। बेहतर शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की उम्मीद ने अभिभावकों का रुझान तेजी से इस ओर मोड़ा है। यही कारण है कि अब न सिर्फ स्थानीय बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी विद्यार्थी यहां दाखिला लेने पहुंच रहे हैं।

फ्री एजुकेशन बना सबसे बड़ा आकर्षण

प्रधानाचार्य अनिरु अनिरुद्ध शर्मा ने बताया कि बाल वाटिका (नर्सरी/केजी) से लेकर आठवीं कक्षा तक न तो कोई एडमिशन फीस लगेगी और न ही मासिक शुल्क देना होगा। इतना ही नहीं, सभी विद्यार्थियों को सरकार की ओर से मिड-डे मील के तहत दोपहर का भोजन भी उपलब्ध कराया जाएगा। यही सुविधाएं इस स्कूल को निजी संस्थानों के मुकाबले कहीं आगे खड़ा कर रही हैं।

निजी स्कूलों से भी हो रहा माइग्रेशन

CBSE दर्जा मिलने के बाद अब कई निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे भी गरली स्कूल का रुख कर रहे हैं। घलौर, चम्बापतन, कूहना , कलोहा, सदवा जैसे दूरदराज क्षेत्रों से भी विद्यार्थी यहां एडमिशन लेने पहुंच रहे हैं, जिससे साफ है कि सरकारी स्कूलों की बदलती तस्वीर अब भरोसे में बदल रही है।

समग्र विकास पर फोकस

प्रधानाचार्य अनिरुद्ध शर्मा ने कहा कि स्कूल में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों और नैतिक शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

बदलते दौर की तस्वीर:

गरली बाल स्कूल अब सिर्फ एक सरकारी संस्थान नहीं, बल्कि गुणवत्ता और भरोसे का नया केंद्र बनकर उभर रहा है—जहां शिक्षा अब सुविधा नहीं, बल्कि अवसर बन रही है।


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