संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मिलने हेतु जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि मंडल का गठन किया:

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By newshimachal24.com

तहसीलदार बिलासपुर को सौंपा मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय लेने हेतु ज्ञापन:


लिखित आश्वासन न मिलने तक संघर्ष व भूख हड़ताल जारी रहेगा:

शुभम ठाकुर /बिलासपुर ।

अलीखड मुद्दे को लेकर त्रिवेणी घाट में हुई किसान महापंचायत
सुक्खू सरकार से मामला हल होने की उम्मीद  मौके पर बनाई गई भविष्य की रणनीति
सरकारों को नीतिगत परिवर्तन की है जरूरत ।
आज किसान महापंचायत में 15 पंचायत के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।आज आंदोलन के 47 दिन पूरे हुए व भुख हड़ताल के 31 दिन पूरे होने पर नम्होेल पंचायत की प्रधान जीवन लता ठाकुर और अन्य सहयोगी महिलाएं बैठी।


बिलासपुर और सोलन जिला की सीमाओं पर पिछले एक महीने से अधिक समय से जारी अलीखड्ड पानी बचाओ मुद्दे को लेकर आज त्रिवेणी घाट में महापंचायत का आयोजन किया गया जिसमे क्षेत्र की समस्त पंचायतों के प्रतिनिधियों सहित भारी संख्या में लोग उपस्थित हुए।

महापंचायत को संबोधित करने वाले मुख्य वक्ता नम्होेल पंचायत की प्रधान जीवन लता ठाकुर, घयाल पंचायत के उप प्रधान देशराज ठाकुर, पूर्व बीडीसी अध्यक्ष रतनलाल ठाकुर, नोग पंचायत के प्रधान संजीव, छकोह पंचायत प्रधान लता चंदेल, गोपाल शर्मा उप प्रधान पंजैल खुर्द, नरेंद्र ठाकुर उप प्रधान निहारखन वासला, सुमन ठाकुर उप प्रधान कोटला पंचायत, भूप चंद प्रधान शिकरोहा, ममता धीमान प्रधान पंजैल खुर्द व इसके अलावा पूर्व के जनप्रतिनिधि व गणमान्य लोग भी मौजुद रहे



महापंचायत को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की छोटी छोटी नदियों का पानी बड़े घरानों को नहीं दिया जाना चाहिए। क्योंकि इससे स्थानीय लोगों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जनता का अधिकार छीनने का किसी को हक नहीं है पूरे हिमालय क्षेत्र के लिए सरकार अपनी नीति बनाए। ताकि जनता का हक बचा रह सके। उन्होंने कहा कि जब भी पानी का विवाद उठेगा तो पहला झगड़ा स्थानीय स्तर पर होगा जिसका ताजा प्रमाण अलिखड्ड मुद्दा है और ऐसे ही झगड़े भविष्य में सब जगह होने वाला है।  उन्होंने कहा कि सरकार अलीखडड के इस मुद्दे को लेकर यह स्पष्ट क्यों नहीं कर रही है कि यह पानी आखिर किसको जा रहा है।  और कौन इसके पीछे है और क्यों इसको जबरदस्ती बनने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े  उद्योगपति कहीं से भी पानी उठा सकती हैं जिसके लिए सतलुज नदी उपयुक्त है लेकिन अलीखड्ड को ही क्यों जबरदस्ती इसके लिए झोंका का रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि लोगों की बात पर संज्ञान लिया जाए और इनकी बात को सुना जाए और इस विवाद को तुरंत समाप्त किया जाए। ताकि क्षेत्र के लोगों के हितों की रक्षा हो सके।
इससे पहले पूर्व विधायक केके कौशल ने कहा कि जनता के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी और अली खड्ड का विवाद जब तक सरकार हल नहीं कर देती तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
  इस अवसर पर अलीखड्ड संघर्ष समिति के संयोजक रजनीश शर्मा ने आंदोलन को सफल बनने के लिए सभी जनप्रतिनिधियों, वार्ड सदस्यों तथा क्षेत्र की प्रभु जनता व सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

रजनीश शर्मा ने स्पष्ट किया कि अलीखड्ड से किसी भी सूरत में अंबुजा के इशारे पर भारी भरकम परियोजना नहीं उठाने दी जाएगी क्योंकि इससे लगभग 50 हजार लोगों के जीवन व खेती पर दूरगामी दुष्परिणाम होंगे, जिनका सरकार और नीतिकारों को अवलोकन करना चाहिए,

इस अवसर पर क्षेत्र के कई पंचायत प्रतिनिधियों ने भी अपनी अपनी बात रखी और सरकार के प्रति अपना आक्रोश जाहिर किया

महापंचायत के दौरान क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी बैठक करके मुख्यमंत्री से मिलकर इस अति संवेदनशील जन समस्या के निवारण हेतु रणनीति भी बनाई।

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